जिलाधिकारी ने स्वीकारा है कि पीड़ित किसानों को फसल बीमा का पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा। कृषि और बीमा विभाग तथा बैंक का गैर जिम्मेदाराना काम और सही सर्वे न किया जाना अत्यंत गंभीर और आपत्तिजनक है।
बीमा कंपनी मनमाना सर्वे करके कंपनी के हितों में किसानों के हितों का ध्यान नहीं रख रहीं। किसानों को बीमा राशि से वंचित किया जा रहा है। डीएम सुरेश कुमार ने यह खरी-खरी अपने लिखित आदेश में कही हैं। साथ ही दैवीय आपदा से पीड़ित किसानों को बीमे का लाभ दिलाने के लिए दो टीमें गठित कर दी हैं।
एक की बागडोर सीडीओ संभालेंगे और दूसरे की कमान जिला विकास अधिकारी को सौंपी गई है। पहली टीम में सीडीओ की अध्यक्षता में उप कृषि निदेशक, सदस्य सचिव और अग्रणी बैंक इलाहाबाद बैंक, बीमा कंपनी प्रतिनिधि और संबंधित बीडीओ सदस्य बनाए गए हैं।
दूसरी टीम में जिला विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला कृषि अधिकारी सदस्य सचिव, अग्रणी जिला प्रबंधक द्वारा नामित प्रतिनिधि तथा बीमा कंपनी प्रतिनिधि व संबंधित बीडीओ सदस्य नामित किए गए हैं। डीएम ने दोनों टीामें को निर्देश दिया है कि फसलों का वास्तविक सर्वे करें। क्षति के मुताबिक ही सर्वे रिपोर्ट तैयार कराएं।
कृषि विभाग अधिकारियों का यह व्यक्तिगत दायित्व होगा कि बैंक और बीमा कंपनियों से मिलकर ज्यादा से ज्यादा बीमित राशि दिलवाएं। इसमें किसी विभाग की भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ऐसा पाया गया तो अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। डीएम ने सीडीओ को नोडल अधिकारी नामित करते हुए कहा है कि अपने व्यक्तिगत सुपरवीजन में कार्रवाई कराकर उन्हें अवगत कराएं।
करतल क्षेत्र में मदद न बंटी तो भुखमरी की नौबत
करतल। उप जिलाधिकारी धीरेंद्र कुमार ने करतल न्याय पंचायत के 18 गांवों और 24 मजरों में फसलों को भारी नुकसान होने की बात स्वीकारी है। अकेलवा गांव में एसडीएम ने खुद निरीक्षण किया।
बताया कि लेखपालों को सर्वे में लगा दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद मुआवजा बांटा जाएगा। बिल्हरका, महाराजपुर, कनाय, पंचमपुर, रगौली, अकेलवा, पुकारी, करतल, नहरी, पुंगरी आदि के किसानों ने आरोप लगाया है कि लेखपाल पक्षपातपूर्ण सर्वे कर रहे हैं।
खाद और बीज में किसानों की जमा पूंजी चली गई। सरकार ने मदद न की तो भुखमरी और आत्महत्या के हालात बन जाएंगे।