बांदा। भारत की असली ताकत प्रकृति और पर्यावरण हैं। इनकी अनदेखी कर विकास की जो कहानी लिखने की कोशिश की जाएगी उससे पर्यावरणीय चक्र बिगड़ना और प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप बढ़ना स्वाभाविक है। कोरोना संकट ने दुनिया को वाकिफ करा दिया कि प्रकृति केंद्रित ही विकास का सही मॉडल है।
यह बात राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन संस्थापक और देश के विख्यात विचारक केएन गोविंदाचार्य ने कही। वह शनिवार को बड़ोखर खुर्द गांव स्थित ह्यूमन एग्रेरियन सेेंटर में आयोजित प्रकृति केंद्रित विकास संवाद गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
गोविंदाचार्य पिछले 28 अगस्त से यमुना यात्रा एवं अध्ययन प्रवास पर निकले हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति केंद्रित विकास की दिशा में कार्य करना वक्त का तकाजा है। हमारा गांव हमारा देश। हमारा जिला हमारी दुनिया।
सबको भोजन सबको काम इत्यादि मुद्दों पर आग्रह बनाए रखते हुए गतिविधियां पिछले करीब 16 वर्षों में सृजित हुईं हैं। कहा कि 2010 में उन्होंने प्रकृति केंद्रित विकास की बात कही थी। लगता है कि आज उस पर जोर देकर क्रियान्वयन का समय आ गया है।
उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा भी है और भारत में आत्मनिर्भर होने का साहस और साधन भी है। शासन और प्रशासन में बैठे लोगों को इस बात पर विश्वास करना है। उसी के अनुसार योजनाएं बनानी हैं।
गोष्ठी के मेजबान प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने गोविंदाचार्य समेत उनके साथ आए लोगों का स्वागत व सम्मान किया। उन्हें स्मृति चिह्न दिए। गोविंदाचार्य के साथ आईं सुप्रीम कोर्ट की वकील हरियाणा की सुबुही खान को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को हमीरपुर के जैविक किसान देव सिंह, अधिवक्ता आनंद सिन्हा, शिक्षक रामशंकर यादव, छतरपुर के किसान अर्जुन सिंह, डॉ. लक्ष्मी त्रिपाठी, विद्याधाम समिति के राजा भइया, साहित्यकार प्रमोद मलय, किसान जाहिद व मजहारुल हसन आदि ने भी संबोधित किया।
कृषि कानूनों में न करें एक-दूसरे पर शक
विचारक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर चल रहे किसान आंदोलन का समाधान संवाद के जरिए निकाला जाना चाहिए। संबंधित पक्ष एक-दूसरे पर शक का रवैया न अपनाएं।
मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने 10 माह पहले आंदोलन की शुरुआत में ही उपरोक्त सुझाव दिए थे। दोनों पक्षों को प्रतिष्ठा का मुद्दा भी नहीं बनाना चाहिए। इसमें कई नए पहलू जुड़ें हैं, इसलिए यह संवेदनशील भी हो गया है।
बताया कि उनकी यमुना यात्रा एवं अध्ययन प्रवास 28 अगस्त से शुरू हुआ है। 15 सितंबर को प्रयागराज में खत्म होगा। गोविंदाचार्य ने कहा कि हमने पिछले 60 सालों में देश चलाने की डिजाइन को बिगाड़ दिया। उप निवेशवादी व्यवस्था को नहीं रोका गया।
गोष्ठी में ये रहे मौजूद
भाजपा नेता संतोष कुमार गुप्त, राजकुमार राज, अमित सेठ भोलू, महिला किसान निधि त्रिपाठी, पूर्व प्रधानाचार्य बाबूलाल गुप्त, लवलेश सिंह, डीसीडीएफ अध्यक्ष सुधीर सिंह, किसान पुष्पेंद्र भाई, संत कुमार गुप्ता, राजा सिंह, श्यामजी निगम, सचिन चतुर्वेदी, ओमप्रकाश मसुरहा, रिजवान अली, जुनैद अहमद आदि।