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Banda News: आधी-अधूरी रिपोर्ट से नहीं खुला डीजल फर्जीवाड़े का राज, दोबारा जांच शुरू

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फोटो-28-बांदा डिपो स्थित डीजल कार्यालय। अमर उजाला
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फोटो-28-बांदा डिपो स्थित डीजल कार्यालय। अमर उजाला
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-बांदा डिपो में 14 हजार लीटर डीजल की अनियमितता की जांच में फिर बदली दिशा
-पहली जांच रिपोर्ट में स्पष्टता न होने पर चार सदस्यीय कमेटी को सौंपी गई पड़ताल

अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। रोडवेज के बांदा डिपो में 14 हजार लीटर डीजल की अनियमितता की जांच एक बार फिर नए सिरे से शुरू हो गई है। पहले जांच अधिकारी एआरएम वित्त एसके गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट क्षेत्रीय प्रबंधक को सौंपी थी। रिपोर्ट में मामले की स्थिति और जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता नहीं हो सकी। इसी बीच जांच अधिकारी 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो गए। अब क्षेत्रीय प्रबंधक चित्रकूटधाम मंडल रामलवट ने चार सदस्यीय नई जांच कमेटी गठित की है। इससे प्रकरण की जांच में करीब दो माह की देरी हुई।

नई जांच कमेटी में एआरएम हमीरपुर राम प्रताप साहू, वरिष्ठ लेखाकार बांदा संदीप यादव, कार्यशाला प्रभारी राठ धांसीराम और एआरएम कार्यालय के बुकिंग क्लर्क अभिषेक मिश्रा शामिल हैं। टीम ने बुधवार को स्टेशन प्रभारी सुशीला सचान, आरके वर्मा, जूनियर फोरमैन सरोज कुमार समेत अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की। निलंबित लिपिक अनिल शुक्ला, सुधीर कुमार और अनिल साहू से भी सवाल-जवाब किए गए।
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कमेटी डीजल की आवक-जावक, स्टॉक, अभिलेखों में दर्ज विवरण और टैंकर खाली कराने की प्रक्रिया की जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अनियमितता किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। कमेटी अब दस्तावेजों और कर्मचारियों के बयानों का मिलान कर रही है। जरूरत पड़ने पर टीम दोबारा डिपो पहुंचकर जांच कर सकती है।
प्रकरण की विस्तृत जांच एआरएम वित्त एसके गुप्ता को सौंपी गई थी। उन्होंने जांच के बाद रिपोर्ट क्षेत्रीय प्रबंधक को दी, लेकिन रिपोर्ट से यह स्पष्ट नहीं हो सका कि डीजल से जुड़ी अनियमितता किस स्तर पर और किसकी जिम्मेदारी से हुई। इसके बाद जांच को नए सिरे से कराने का निर्णय लिया गया। जांच अधिकारी के सेवानिवृत्त होने से भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

आठ जुलाई को सामने आया था मामला

अधिकारियों के अनुसार, आठ जुलाई को 14 हजार लीटर डीजल लेकर ट्रक बांदा डिपो पहुंचा था। डिपो में जगह न होने के कारण उसी दिन अभिलेखों में ट्रक खाली दिखाया गया, जबकि अधिकारियों के मुताबिक टैंकर नौ जुलाई को खाली कराया गया। इसके बाद डीजल लिपिक अनिल साहू ने क्षेत्रीय प्रबंधक से शिकायत कर डीजल में गड़बड़ी की आशंका जताई थी। प्रारंभिक जांच में डीजल घोटाले की पुष्टि के बजाय अभिलेख और प्रक्रिया में अनियमितता सामने आने की बात कही गई थी। इसके बाद लिपिक अनिल शुक्ला, सुधीर सिंह और अनिल साहू को निलंबित किया गया। पांच अन्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया। बाद में स्टेशन प्रभारी सुशीला सचान और आरके वर्मा को भी निलंबित किया गया था। जूनियर फोरमैन सरोज कुमार को आरोपपत्र जारी किया गया।
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वर्जन
नई जांच कमेटी का गठन किया गया है, ताकि मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सके। कमेटी ने बुधवार को डिपो में जांच की और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की है। अभिलेखों की भी जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि गड़बड़ी कहां और किस स्तर पर हुई। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - रामलवट, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज चित्रकूटधाम मंडल
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