पुलिस लाइन में तैनात फालोअर के पति की हत्या के मुख्य अभियुक्त शैलेंद्र उर्फ शीलू तिवारी को अदालत ने आजीवन कारावास और 1.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
पुलिस लाइन फालोअर रेखा ने 30 अक्तूबर 2003 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि शैलेंद्र तिवारी उर्फ शीलू पुत्र रामसनेही निवासी कटरा (सिंहवाहिनी) अपने कार चालक शेरू पुत्र गजीर उर्फ कायम निवासी रसूलपुर (गिरवां) और दो अज्ञात के साथ रात को पुलिस लाइन आया और अपने बीमार दोस्त को जौरही से बांदा अस्पताल लाने के लिए उससे बोलेरो मांगी।
बोलेरो उसका पति बाबू प्रसाद चलाकर उन्हें ले गया। दो दिन बाद शहर कोतवाली क्षेत्र के कुरौली गांव में बाबू प्रसाद का शव कुएं में मिला। पुलिस ने दो माह बाद कटनी (मध्य प्रदेश) रेलवे स्टेशन से बोलेरो बरामद कर कुरौली गांव निवासी दिनेश उर्फ गुड्डू द्विवेदी पुत्र रामबहोरी, माता प्रसाद पुत्र रामाधार को गिरफ्तार किया था।
अभियुक्त शीलू और उसका चालक शेरू उर्फ लाला जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद अदालत नहीं आए। इस मामले में विशेष न्यायाधीश (डकैती) बृजलाल चौरसिया ने 27 जुलाई 2015 को आरोपी दिनेश और माता प्रसाद को संदेह के आधार पर बरी कर दिया।
मंगलवार को शैलेंद्र तिवारी उर्फ शीलू को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। विशेष न्यायाधीश ने उसे हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 1.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न अदा करने पर 20 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
जुर्माने की आधी रकम मृतक की पत्नी रेखा को दी जाएगी। शीलू का चालक शेरू अभी भी फरार है। उसकी पत्रावली अलग कर दी गई है।
पिता और दो पुत्रों को कैद
गैर इरादतन हत्या के मामले में अभियुक्त पिता और दो पुत्रों को अदालत ने 10 वर्ष का कारावास और 10 हजार रुपये से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
गिरवां थाना क्षेत्र के मुरवां गांव निवासी विनोद ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि वह और उसका पिता राजू 17 जून 2007 को अपने दरवाजे पर बैठे थे। अचानक गांव के गज्जा पुत्र चौबा रैदास और गज्जा के पुत्र छोटू और रमजान ने कुल्हाड़ी व लाठियों से उन पर हमला कर दिया।
राजू के सिर पर कुल्हाड़ी लगने से वह लहूलुहान हो गया। इलाज के दौरान राजू की मौत हो गई। पुलिस ने तीनों को विरुद्ध संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की। अस्पताल में मौत होने के बाद मुकदमा गैर इरादतन हत्या में तरमीम कर दिया गया।
सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) अरुण कुमार मल्ल की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता विमल सिंह ने 6 गवाह पेश किए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस और पत्रावली के अवलोकन के बाद अदालत ने तीनों को सजा सुनाई।