बांदा। एक लाख रुपये गुंडा टैक्स की फरमाइश पूरी न होने पर हिस्ट्रीशीटर द्वारा पांच अन्य साथियों के साथ प्रधान व उसके दो अन्य साथियों को गोली मारकर घायल कर देने के जुर्म में अदालत ने एक आरोपी को 10 साल की कठोर कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना और दूसरे आरोपी को एक वर्ष की कैद व 1000 रुपये जुर्माना हुआ है। शेष चार आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया गया है।
गिरवां थाना क्षेत्र के सौंता स्योढ़ा गांव के प्रधान रज्जू त्रिपाठी ने कोतवाली नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह शहर के मोहल्ला खुटला रहुनियां में किराए के मकान में रहता था। पहली जुलाई 2017 क ी शाम 6 बजे वह अपने साथी अरुण कुमार पुत्र सरोज (खुरहंड) व विष्णु पुत्र लाला (सौंता स्योढ़ा) के साथ जा रहा था तभी पहले से घात लगाए बैठे कांशीराम कालोनी (खुटला) निवासी कमर उर्फ कमल दादा पुत्र निजाम और खुटल्ला मोहल्ला निवासी खादिम पुत्र मुजफ्फर खां, हसीब पुत्र मेंहदी हसन, पप्पू तिनपतिया, हैदर पुत्र इसरार, सप्पू पुत्र टेढ़ी ने उसे और उसके दोनों साथियों को पकड़कर तमंचे की बटों व लोहे की राड से हमलाकर घायल कर दिया।
अरुण कुमार को तमंचे से गोली मार दी। हमलावर फरार हो गए। डाक्टरों ने अरुण कुमार को कानपुर रेफर कर दिया। हमले की वजह कुछ दिनों पूर्व प्रधान से रंगदारी के रूप में मांगे गए एक लाख रुपये न देना बताया।
पुलिस ने धारा 147, 148, 149, 307, 387 आईपीसी व शस्त्र अधिनियम की धारा 3/25/27 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करके चार्जशीट अदालत में दाखिल की।
त्वरित न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अभियोजन व बचाव पक्ष की सुनवाई के बाद शुक्रवार को सुनाए फैसले में आरोपी कमर उर्फ कमल दादा को धारा 307 में 10 साल की कठोर कैद व 20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर 4 माह और जेल में रहना पड़ेगा। रंगदारी में धारा 387 आईपीसी में 5 साल की कैद व 2 हजार रुपये जुर्माना किया।
जुर्माना न देने पर 1 माह की और कैद होगी। शस्त्रत्त् अधिनियम में क्रमश: डेढ़ साल की कैद व 2000 रुपये जुर्माना और तीन साल की कैद व 3000 रुपये जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर क्रमश: एक माह व 15 दिन की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। सभी सजाएं साथ चलेंगी। आरोपी खादिम को धारा 323 में एक साल की कैद व एक हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर 15 दिन की और जेल भुगतनी पड़ेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता आशुतोष मिश्र ने 5 गवाह पेश किए।