शनिवार से शुरू हो रहे श्रावण मास में पुण्य की बारिश होगी। सृष्टि के रक्षक व भक्तों के पालनहार महादेव शंकर की स्तुति श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल देगी। गृह नक्षत्रों की जुगलबंदी महादेव के साधनाकाल (श्रावण मास) में भक्तों को समृद्धि देकर पापों का विनाश करेगी। नगर व ग्रामीण इलाकों में शिवालयों में शिव आराधना और रुद्राभिषेक की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित उमाकांत त्रिवेदी के मुताबिक सावन में शोभन, सौभाग्य, व्याघ्र व शिव नामक योग यम नियम से महादेव का ध्यान पूजन करने पर उत्तम फल प्रदान करेंगे। कन्याएं व्रत रहकर प्राचीन शिवलिंग का सच्चे हृदय से दर्शन-पूजन करेंगी तो उन्हें मनचाहे वर की प्राप्ति होगी।
सुहागिन के पति को हर भवसागर से निदान मिलता है। सावन माह में शिव की स्तुति करने के लिए कावंरियों का जमघट लगता है। भगवा वस्त्र धारी कांवरिये पैदल कांवड़ में जल लेकर शिवमंदिरों में चढ़ाएंगे। सैकड़ों कावरिये नंगे पांव काशी व बाबा धाम जाएंगे।
पंडित गजानन कृष्ण शास्त्री (स्वराज कालोनी) बताते हैं सावन माह का शनिवार एक अगस्त को आरंभ होकर श्रावणी पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन 29 अगस्त शनिवार को समाप्त होगा। जो अत्यंत दुर्लभ संयोग है। वहीं 11 अगस्त को भौम प्रदोष व्रत हर्षण योग में होगा।
जबकि 27 अगस्त को द्वादशी व त्रयोदशी संयोग में प्रदोष व्रत सौभाग्य नामक योग में होगा। सावन में रुद्राभिषेक से भक्तों को विशेष लाभ मिलता है। कुश मिश्रित जल से अरोग्य की प्राप्ति, गन्ने के रस से धन की प्राप्ति, गोदुग्ध से संतान की प्राप्ति, सरसों के तेल से शत्रुनाश, देसी घी से वैभव की प्राप्ति और चीनी मिश्रित जल से रुद्राभिषेक करने पर ज्ञान की प्राप्ति होती है।
सावन के सोमवारों की स्थिति
सावन का पहला सोमवार तीन अगस्त से शुरू होगा। इसमें पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र व शोभन योग रहेगा। कर्क राशि में सूर्य, बुध एवं मंगल के संचरण करने से त्रिग्रहीय योग बनेगा। यहीं से भारी वर्षा का योग भी बन रहा है। दूसरा सोमवार 10 अगस्त को मृगशिरा नक्षत्र, व्याघ्र योग में पड़ेगा। तीसरा सोमवार 17 अगस्त को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, शिव नामक योग का दुर्लभ संयोग बनाएगा। नाग पंचमी का पर्व 19 अगस्त को होगा। जबकि चौथा सोमवार 24 अगस्त को ज्येष्ठा नक्षत्र में होगा। इस दिन वैधृति योग बनेगा।
ऐसे करें शिव साधना
पंडित उमाकांत शास्त्री बताते हैं कि शिव की साधना नियम से करनी चाहिए। सावन 16 सोमवार व्रत आरंभ करने का सबसे उपयुक्त समय होता है। सावन में व्रत रखने वाले साधक को ओम नम: शिवाय से भगवान शिव व ओम नम: शिवायै से पार्वती का षोड़शोपचार पूजन करना चाहिए। शिवलिंग को दूध, दही, शहद, शक्कर, घी से स्नान कराएं। उसमें गंध, चंदन, सफेद फूल, भस्म, बेलपत्र, मदार, भांग चढ़ाकर पूजन करें। सुबह-शाम ओम नम: शिवाय का 108 बार जप करना लाभकारी होता है।