बांदा। जनपद में पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के लागू हुए करीब आठ साल हो गए हैं। इतने सालों में 1,05,478 लोगों को आवास योजना के तहत घर दिया गया है। इसके बावजूद 1,59,096 लोग फिर बेघर निकल आए हैं। इससे सवाल उठने लगा है कि जब सभी पात्र लोगों को घर मिल गया तो आवास के लिए इतने पात्र कहां से आ गए?
बता दें कि जब वर्ष 2017 में पीएम आवास योजना (ग्रामीण) की शुरूआत हुई थी, तो साल 2012 में बनाई गई बीपीएल की सूची के अनुसार जिले में आवास योजना के लिए कुल 1,07,042 लोग पात्र मिले थे। इनमें से अब तक 1,05,478 लोगों का आवास बन चुका है। अब सरकार के निर्देश पर ग्राम पंचायतों में आवास योजना के पात्रों का ग्राम पंचायतों के माध्यम से सर्वे कराया गया तो 1,59,096 परिवार फिर से आवास के लिए पात्र पाए गए हैं।
बताते हैं कि पात्र पाए गए परिवारों में से 50 फीसदी कच्चे मकान में रह रहे हैं। जबकि 35 फीसदी के पास एक कमरा पक्का है, शेष मकान कच्चा है। वहीं, 15 फीसदी परिवार झोपड़ी में रह रहे हैं। यह सभी पीएम आवास योजना के मानकों को पूरा करते हैं। इसी संख्या पर सवाल उठ रहा है।
इस पर मुख्य विकास अधिकारी वेद प्रकाश मौर्य का कहना है कि बीते सालों में जिले की आबादी बढ़ी है। पहले एक पिता आवास का दावेदार था, बाद में उसके दो-तीन बेटे दावेदार हो गए। इस तरह आवास के लिए पात्रों की संख्या बढ़ी है। सर्वे कराया गया है, इसमें जो भी आवास के लिए पात्र पाए गए हैं, उनका सत्यापन कराया जाएगा। जो आवास योजना के मानक के तहत पात्र पाए जाएंगे, उन्हें आवास आवंटित किया जाएगा।
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अब तक बने आवास व सर्वे में पात्र मिले परिवार
ब्लॉक बने आवास पात्र परिवार
बबेरू 8,413 21,797
बडोखर 11,921 12,674
बिसंडा 16,006 17,677
जसपुरा 7,267 11,786
कमासिन 11,648 20,812
महुआ 18,183 27,748
नरैनी 21,383 29,836
तिंदवारी 10,657 16,766
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योग- 1,05,478 1,59,096
मकान बनवाने के लिए मिलते हैं 1.20 लाख रुपये
योजना के तहत पात्र परिवार को मकान बनाने के लिए सरकार 1.20 लाख रुपये तीन किस्तों में देती है। पहली किस्त में पिलर आदि तैयार करने के लिए 50 हजार की राशि दी जाती है। स्लेप स्तर पर मकान तैयार होने पर दूसरी और छत डालने के बाद तीसरी किस्त दी जाती है।
-समय के साथ ही परिवारों में बंटवारे हुए। पहले पिता पात्र थे, अब उनके बेटे दावेदार हैं। सर्वे के बाद अब पात्रता के आधार पर आवास आवंटित किए जाएंगे।
-वेद प्रकाश मौर्य, मुख्य विकास अधिकारी, बांदा