बांदा। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए जिले में डॉक्टरों की तैनाती न होना अभिशाप बनता जा रहा है। कुछ ऐसा ही चिल्ला थाना क्षेत्र के एक गांव की दुष्कर्म की शिकार मासूम की घटना में भी हुआ। जिले में एक भी पिडियाट्रिक सर्जन न होने से मासूम की जान चली गई। अगर सही समय पर उसकी सर्जरी हो जाती तो शायद वह बच जाती।
चिल्ला थाना क्षेत्र में मासूम से दरिंदगी की घटना में पुलिस ने उसे चार जून को तड़के दो बजे पदारथपुर के जंगल से बरामद किया था। करीब ढाई बजे जसपुरा थानाध्यक्ष अनुपमा तिवारी गोद में लेकर जिला अस्पताल के ट्रॉमा पहुंचीं। यहां चार डॉक्टरों की टीम ने डेढ़ घंटे बच्ची को देखने के बाद सर्जरी और वेंटीलेटर की जरूरत होने पर सुबह चार बजे रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया।
साढ़े चार बजे रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के आईसीयू वार्ड में मासूम को भर्ती किया गया था। यहां करीब आठ घंटे तक पिडियाट्रिक फिजिशियन, गायनी, नेत्र रोग विशेषज्ञ और सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष ने अपनी मॉनिटरिंग में रखा। सर्जरी की जरूरत पड़ने पर पिडियाट्रिक सर्जन न होने पर उसे कानपुर हैलट के लिए रेफर किया गया था।
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बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए पिडियाट्रिक सर्जन की जरूरत थी, पर जिले में एक भी पिडियाट्रिक सर्जन नहीं था। इस कारण बच्ची को कानपुर रेफर करना पड़ा था। कानपुर के जिलाधिकारी से बात करके बच्ची के इलाज की समुचित व्यवस्था भी कराई थी। पुलिस की टीम भी बच्ची की निगरानी में लगाई थी, लेकिन, पिता की ओर से सर्जरी की अनुमति न देने के कारण वह नहीं बच सकी थी।-पलाश बंसल, पुलिस अधीक्षक।
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रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में पिडियाट्रिक सर्जन का पद रिक्त चल रहा है। शासन से मांग की गई है, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी। चार जून को बच्ची को सर्जरी की जरूरत थी, लेकिन पिडियाट्रिक सर्जन न होने से रेफर करना पड़ा था। -डॉ. सुनील कुमार कौशल, प्रधानाचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।