रोडवेज बसों की लेटलतीफी पर परिवहन निगम प्रशासन ने अंकुश लगाने की कवायदें शुरू कर दी हैं। बसों को निेर्धारित समये पर चलाने का मुख्य जिम्मा ड्राइवर और कंडक्टर पर होगा। देरी होने पर इन्हीं दोनों पर गाज गिरेगी। नियमित कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई होगी और संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त की जाएगी।
आमतौर पर सभी रूटों की रोडवेज बसें निर्धारित समय पर नहीं चल रहीं। इससे निगम की छवि धूमिल हो रही है। यात्रियों का रुझान भी घट रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक पी गुरु प्रसाद ने क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों (एआरएम) को जारी आदेश में कहा है कि बसों की लेटलतीफी से यात्रियों में परिवहन निगम के प्रति विश्वसनीयता कम हो रही है।
इसका सीधा असर राजस्व पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा है कि अनाधिकृत ढाबों पर रोकने या अधिकृत ढाबों पर निर्धारित समय से ज्यादा ठहराव पर चालक और कंडक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। एआरएम को निर्देश दिया कि वे बसों के शेड्यूल और यात्रियों की उपलब्धता पर नियमित समीक्षा करें। कम लाभ वाली बसों को चिह्नित कर मार्ग परिवर्तन किया जाए।
प्रबंध निदेशक ने कहा कि सुगम और समयबद्ध यात्रा से यात्रियों की संख्या में इजाफा होगा और आय भी बढ़ेगी। लेटलतीफ बस संचालन के दोषी चालक और परिचालक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। सुधार न होने पर जुर्माना व संविदा समाप्त करने के भी आदेश दिए हैं। चित्रकूटधाम परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव अग्रवाल ने बताया कि प्रबंध निदेशक के आदेश पर नया नियम तत्काल लागू हो गया है। समय की पाबंदी के लिए चालक-परिचालकों को सख्त हिदायत दी गई है। बसों पर समय-सारिणी अंकित कराई गई है।