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मंत्री की सुन लेते तो न होती हत्या

Tue, 23 Feb 2016 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा।
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पुलिस की लापरवाही से रिश्तेदारों के बीच का विवाद हत्या में बदल गया। उसकी गुहार पर प्रदेश के मंत्री ने एसपी को पत्र लिखकर कार्रवाई का निर्देश दिया था। उसके तीसरे दिन ही हत्या हो गई। अब भी आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर है। मृतक की बहन ने अब पुत्र पर भी जान का खतरा बताते हुए एक बार फिर पुलिस अफसरों से फरियाद की है।
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मामला बबेरू कोतवाली क्षेत्र के श्रृंगार थोक मोहल्ले का है। विद्यावती पत्नी वीरबल सिंह ने पुलिस अधिकारियों को दी अर्जी में बताया कि वह 30 वर्ष से अपने सगे भाई राजा सिंह के साथ रह रही है। उसके पुत्र की परवरिश राजा सिंह ने ही की है और खेती भी उसी के नाम करा दी है। इससे राजा का भाई देशराज सिंह व बब्बू सिंह तथा देशराज के पुत्र पुष्पेंद्र व रज्जन रंजिश मानने लगे।

15 फरवरी को रात 9 बजे आबादी का प्लाट मनोज को न देने के लिए कहा। न मानने पर पुष्पेंद्र ने राजा सिंह के गले में रस्सी का फंदा कस दिया। देवराज व रज्जन ने राजा के हाथ पकड़ लिए। बबलू व बब्बू ने पैर दबा लिए। बचाने गई विद्यावती को कमरे में बंद कर दिया। राजा सिंह की हत्या कर दी। शव को फंदे पर लटका दिया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट की बात कही। आरोपियों में एक जिला बदर हो चुका है।
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खास बात यह है कि प्रदेश के कृषि राज्यमंत्री राजीव कुमार सिंह ने हत्या के तीन दिन पूर्व 12 फरवरी को पुलिस अधीक्षक को आधिकारिक पत्र भेजकर मनोज आदि की अर्जी का हवाला देकर राजा सिंह की जान को खतरा बताते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया था। मंत्री का यह पत्र भी पुलिस को राजा सिंह की जान बचाने के लिए मजबूर नहीं कर सका। हत्या की रिपोर्ट दर्ज होेने के बाद भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए हैं। विद्यावती ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि उसके पुत्र मनोज को भी अब खतरा है।
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