बांदा। राज्यपाल आंनदीबेन ने दीक्षा समारोह में कहा कि आम लोगों की थाली से प्रोटीन गायब है। पहले घरों में खाने के साथ यह अवश्य होता था। अब थाली में पाश्चात खाना अधिक होता है। जिससे लोग बीमार हो रहे हैं।
सरकार प्रति व्यक्ति सात हजार रुपये चिकित्सीय व्यवस्थाओं व दवाओं में खर्च कर रही है। मेडिकल कालेज, अस्पताल खोलने में लाखों खर्च किए जा रहे हैं। सलाह दी कि खाने में दाल, हरी सब्जियां, छाछ, अचार, जैविक गेहूं व चने के आटे की रोटियों का सेवन करना चाहिए। साथ ही बच्चों को भी इन्हें खाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। ताकि बीमारी से बचाव हो सके।
पहले के लोग प्रोटीन युक्त खाना खाकर निरोग रहते हुए 100 साल से अधिक जीवित रहते थे। इसके अलावा उन्होंने हमीरपुर की 100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को किट दी। कहा कि इस किट में हाथ धाेने का साबुन, छोटी तौलिया व अन्य वस्तुएं हैं। ताकि बच्चों को केंद्रों में खाने के पहले हाथ धोने व पोंछने की आदत डाली जा सके। बोलीं किट में कंघा, आइना, सुई, डोरा भी है। बच्चे घर से कंघी करके न आए तो उन्हें कराई जाए। शर्ट का बटन टूटा हो तो टाक दें। ताकि वह घर जाकर मां को बताएं और वह आगे से साफ-सफाई पर ध्यान दें। (संवाद)
मिट्टी के कार्बन स्तर को बढ़ाने की जरूरत : डॉ. चिरूपमल्ली
फोटो 04 - दीक्षा समारोह को संबोधित करते डॉ. चिरूपमल्ली निवास राव। संवाद
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बांदा। दीक्षा समारोह में मुख्य अतिथि पूसा कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. चिरूपमल्ली निवास राव ने कहा कि बदलते जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों को जलवायु अनुकूल खेती अपनाने की जरूरत है। उन्होंने मिट्टी के कार्बन स्तर को बढ़ाने, माइक्रो इरिगेशन और सोलर एनर्जी आधारित कृषि को बढ़ावा देने की बात कही।
समारोह में अंश सक्सेना को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, देवांशिका यादव, प्रिया कायल, मो. आरिफ, साबान, दीपक, आकांक्षा चौहान, आलोक साहू, सौम्या पांडेय, सृजन यादव, अभिलाष यादव, सुधीर प्रजापति और ऋतिक रोशन समेत कुल 19 छात्रों को मेडल प्रदान किए गए। राज्यपाल ने अंत में आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए स्वच्छता सामग्री, स्टेशनरी, खिलौने और साइकिलें वितरित कीं तथा जिलाधिकारी और सीडीओ को राजभवन से प्राप्त पुस्तकों के सेट भेंट किए।
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पानी व तेल प्रतिरोधी हैं यह उपाधियां, नई प्रजातियां कीं विकसित
कुलसचिव प्रो. एसके सिंह ने बताया कि इस वर्ष उपाधियों के कागज में परिवर्तन किया गया है। अब सभी उपाधियां सिंथेटिक कागज पर मुद्रित होंगी। यह पानी और तेल प्रतिरोधी होने की वजह से आसानी से फाड़ी नहीं जा सकती हैं। इससे उपाधियां लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगी। बताया कि पहली बार नैक मूल्यांकन में ‘ए’ ग्रेड प्राप्त कर विश्वविद्यालय ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस वर्ष 57 नई शोध परियोजनाएं तैयार की गईं और 33 सक्रिय परियोजनाओं पर कार्य जारी है। विश्वविद्यालय द्वारा अलसी, तिल और तोरई की नई प्रजातियां विकसित की गईं। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत चार प्रदर्शन इकाइयां स्थापित की गईं। बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत 2363 क्विंटल प्रमाणित बीज का उत्पादन किया गया है।
महामहिम को भेंट की पुस्तकें व घरेलू खाद्य उत्पाद
तिंदवारी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बांदा आगमन पर कृष्ण दत्त सिंह ने उन्हें अपनी स्वलिखित पुस्तकें भेंट कीं। इसके अलावा बांदा की अर्चना शुक्ला द्वारा बने घरेलू खाद्य उत्पाद, रागी, मक्का, ज्वार के लड्डू, ऑर्गेनिक अचार, चटनी, बुकनू आदि बुंदेलखंडी खाद्य पदार्थ भी भेंट किए गए।
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फोटो 04 - दीक्षा समारोह को संबोधित करते डॉ. चिरूपमल्ली निवास राव। संवाद
फोटो 04 - दीक्षा समारोह को संबोधित करते डॉ. चिरूपमल्ली निवास राव। संवाद