I will not give instructions now, I will sit and do the work myself
- फोटो : BANDA
बांदा। ‘कोई प्लानिंग नहीं है। सब काम हवा में हो रहा है। बताइए जल्दी, निर्माण में कितना वक्त लगेगा? अब मैं निर्देश नहीं दूंगा, खुद बैठकर यहां काम कराऊंगा।’ तीखे तेवर और डांट-फटकार के लहजे में ये शब्द थे झांसी रेल मंडल प्रबंधक (डीआरएम) आशुतोष कुमार के। वे बुधवार को बांदा-झांसी रूट पर दुरेड़ी गांव के पास निर्मित अंडरपास का स्थलीय निरीक्षण कर रहे थे।
डीआरएम विशेष ट्रेन से करीब साढ़े 11 बजे झांसी से यहां आए। रेलवे स्टेशन से चंद किलोमीटर दूर दुरेड़ी अंडरपास पहुंचे। यह अंडरपास पुनर्निर्मित कराया जा रहा है। चार माह से काम चल रहा है। अब तक नया निर्माण तो दरकिनार पुराना निर्माण भी नहीं टूट सका। यह देखकर डीआरएम का पारा चढ़ गया। वरिष्ठ मंडल अभियंता एससी दुबे से बोले- अभी तक खुदाई भी पूरी नहीं हुई। कोई प्लानिंग नहीं की गई है। सिर्फ हवा में काम चल रहा है।
मुझे भी ऊपर जवाब देना पड़ता है। ऐसा काम करें कि इश्यू न बने। डीआरएम का गुस्सा यहीं नहीं थमा। बोले- अभी पिछली बार की गलती से निपट नहीं पाए। दोबारा गलती हुई तो बच नहीं पाओगे। निर्देश दिया कि अंडरपास के मोड़ को खत्म कर इसे सीधा बनाया जाए।
डीआरएम ने खबरदार किया कि लापरवाही किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 10 दिन के अंदर अपनी प्लानिंग बनाएं। मुझे रोजाना फोटो और वीडियोग्राफ चाहिए। डीआरएम के इन तेवरों पर स्थानीय रेल अधिकारी और अभियंता सहमें नजर आए।
यहां के बाद डीआरएम सड़क मार्ग से बांदा रेलवे स्टेशन आए। यहां विभागीय सर्किट हाउस में स्थानीय रेल अधिकारियों के साथ करीब 30 मिनट बैठक की। शाम करीब तीन बजे विशेष ट्रेन से वापस झांसी के लिए रवाना हो गए। निरीक्षण के दौरान सहायक मंडलीय अभियंता प्रदीप कुमार, वरिष्ठ खंड अभियंता शिव सिंह, स्टेशन अधीक्षक कृष्ण कुमार कुशवाहा सहित जीआरपी व आरपीएफ स्टाफ मौजूद रहा।