बांदा। ससुराल में युवती की मौत के मामले में अदालत ने पति को दोषी पाते हुए पांच वर्ष की सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। आरोपी सास को उसकी वृद्धावस्था के मद्देनजर जेल में बिताई गई अवधि की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया है।
बबेरू कोतवाली क्षेत्र के फुंफुंदी गांव निवासी जियालाल पुत्र रामधनी ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि उसने अपनी बेटी ममता उर्फ शैल कुमारी की शादी 27 मई, 2015 को कायल गांव निवासी लवकुश उर्फ मनीष पुत्र शत्रोहन के साथ की थी।
ससुराल में दहेज के लिए ममता को प्रताड़ित किया जाता रहा। 30 सितंबर 2015 को ससुराल में उसे जलाकर मार दिया गया। पुलिस ने पति, सास सहित ससुराल के आठ लोगों के खिलाफ धारा 498 ए, 304 बी, 506 आईपीसी व 3/4 दहेज अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की। विवेचना में पति और सास के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया। शेष छह अभियुक्तों को क्लीन चिट दे दी।
आरोपी पति लवकुश और सास हीरामणि पिछले करीब साढे़ चार साल से जेल में ही हैं। हाईकोर्ट से भी जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है। अदालत में अभियोजन की ओर से एडीजीसी देवदत्त मिश्रा ने नौ गवाह पेश किए। दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों के आधार पर गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश ने खुली अदालत में फैसला सुनाया।
पति लवकुश को धारा 306 में पांच वर्ष की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा दी। सास हीरामणि को जेल में बिताई अवधि की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना जमा न करने पर को क्रमश: एक माह और दो माह जेल में और रहना होगा। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी। न्यायालय ने मृतका के माता-पिता को नियमानुसार मुआवजा के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव को सिफारिश के निर्देश दिए हैं।