बांदा। लॉकडाउन के दौरान सूरत से ट्रेन से झांसी पहुंचे तीन युवक और कानपुर में फंसे दो युवक रेलवे ट्रैक के सहारे पैदल चलकर बृहस्पतिवार की रात अपने-अपने गांव तो पहुंच गए, लेकिन यहां ग्रामीणों ने उनको गांव में घुसने नहीं दिया। पांचों ने रात गांव के बाहर गुजारी। सुबह जिला अस्पताल में परीक्षण के बाद पांचों को उनके घरों में 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया।
मटौंध थाने के करछा गांव निवासी वीर सिंह, छोटू सिंह और संजय कुमार गुजरात के सूरत में काम करते हैं। देश में लॉकडाउन के बाद किसी तरह तीनों ट्रेन से 24 मार्च की सुबह झांसी पहुंच। यहां से गांव के लिए कोई वाहन नहीं मिला तो तीनों दोपहर बाद पैदल ही रेलवे पटरियों के सहारे चल पड़े। झांसी से गांव तक करीब 225 किमी का सफर तय करके वे बृहस्पतिवार रात 11:30 बजे गांव पहुंचे। गांव वालों ने उनको बिना स्वास्थ्य परीक्षण कराए अंदर दाखिल होने से मना कर दिया। तीनों युवकों ने काफी मिन्नतें कीं, लेकिन सब बेकार गईं।
इसी तरह देहात कोतवाली के जौरही और मरका गांव में भी दो युवकों को नहीं घुसने दिया गया। जौरही का मातादीन विश्वकर्मा और मरका का अनिल रैदास कानपुर में काम करते थे। दोनों 24 मार्च की रात करीब 150 किमी का सफर पैदल रेल पटरियों के सहारे तय कर बृहस्पतिवार की रात गांव पहुंचे थे।
गांव में न घुसने देने से दोनों ने रात अपने-अपने गांव के बाहर गुजारी। सुबह पुलिस ने पांचों युवकों को जिला अस्पताल पहुंचाया तो स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। किसी में कोरोना संक्रमण के लक्षण नहीं मिले, लेकिन सबको होम क्वारंटीन कर दिया गया।