बांदा। महानगरों से लौटे मजदूरों के चेकअप का सिलसिला जारी है। बुधवार को 21 लोगों ने जिला अस्पताल के आइसोलेशन विभाग में अपनी जांच कराई। इनमें 15 को संदिग्ध पाए जाने पर होम क्वारंटीन किया गया है। पिछले एक हफ्ते में यहां बाहर से आने वाले करीब दो सौ लोगों की जांच हो चुकी है। हालांकि किसी को कोरोना से संक्रमित नहीं पाया गया। उधर, संक्रमण की आशंका पर मेडिकल कालेज के आइसोलेशन वार्ड में चार मरीज भर्ती हैं।
जनता कर्फ्यू के बाद महाराष्ट्र, दिल्ली और गुजरात लॉकडाउन किए जाने पर यहां के पलायित मजदूर अपने घर लौट आए हैं। चिह्नित कर मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में इनकी जांच की जा रही है। उनका पूरा ब्योरा रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। बुधवार को जिला अस्पताल में 21 लोगों का परीक्षण हुआ। 15 लोग जुकाम-बुखार और खांसी से पीड़ित मिले। इनमें दिल्ली से 5, मुंबई और जौनपुर से 3-3 तथा चंडीगढ़, हैदराबाद, अहमदाबाद, रीवां (एमपी) से आए एक-एक मजदूर शामिल हैं। इन सभी को होम क्वारंटीन की सलाह दी और दवाएं देकर घर भेज दिया।
उधर, मेडिकल कालेज प्रिंसिपल डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि आइसोलेशन में चार मरीज भर्ती हैं। इनमें एक दुबई से और तीन महानगरों से लौटे हैं। फिलहाल इनमें से किसी में कोरोना के लक्षण नहीं पाए गए। प्रिंसिपल ने बताया कि मेडिकल कालेज में 100 बेड का आइसोलेशन और 240 बेड का क्वारंटीन वार्ड बनाया गया है।
मुख्यालय के दो कंट्रोल रूम में 270 शिकायतें
बांदा। पुलिस लाइन में बनाए गए जिलास्तरीय कंट्रोल रूम के नंबर- 05192-224460 पर अब तक करीब 150 कॉल आ चुकी हैं। इनमें महानगरों से लौटने वालों की सूचना दी गई है। स्वास्थ्य विभाग को इससे अवगत कराया जा रहा है। एडीएम संतोष बहादुर सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम संबंधित गांव जाकर आने वाले मजदूरों के स्वास्थ्य का परीक्षण करती है। उधर, सीएमओ डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि उनके कार्यालय के कंट्रोल रूम (05192-224872) में अब तक 120 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र की हैं। सभी शिकायतों का निस्तारण किया गया। ब्लाक स्तर पर टीमें गठित की गई हैं।
सिर्फ अफसरों के बंगले और कालोनी सैनिटाइज
बांदा। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आम लोगों से ज्यादा अफसरों को कोरोना संक्रमण से बचना जरूरी है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभागों की कवायदें यहीं दर्शा रही हैं। पूरे शहर और कस्बों में गंदगी है। सफाई की विशेष व्यवस्था या अभियान नहीं है। शहर के करीब सवा तीन लाख और जिले के करीब 17 लाख बाशिंदे इन्हीं परिस्थितियों में रह रहे हैं।
दूसरी तरफ कलक्ट्रेट से लेकर अफसरों की कालोनियों तक सफाई, दवाओं का छिड़काव और सैनिटाइज चल रहा है। कलक्ट्रेट में बैरीकेडिंग लगाकर आम लोगों को अफसरों के कक्ष में दाखिल होने पर रोक लग गई है। बरामदे में शिकायत पेटिका रख दी गई। उन्हीं में लोगों से अपनी अर्जी डालने को कहा जा रहा है। यहां आने वाले फरियादियों के पैर धुलने के लिए पानी की टंकी (थ्रो वॉक) बनाई गई है। उधर, मलेरिया विभाग की टीमें अफसरों के आवासों, कालोनियों और दफ्तरों को हाइपोक्लोराइड दवा से सैनिटाइज कर रही हैं।
सुपरवाइजर हिमकृष्ण त्रिपाठी ने बताया कि जिला पुरुष और महिला अस्पताल सहित मंडलायुक्त आवास व कार्यालय, डीआईजी आवास, अपर आयुक्त, डीएम व एसपी आवास को सैनिटाइज किया गया है। सुपरवाइजर ने कहा कि फिलहाल सार्वजनिक स्थानों को सैनिटाइज करने के लिए कोई आदेश नहीं मिले। सड़कों व गलियों को सैनिटाइज करने का जिम्मा नगर निकायों का है।