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पथरीले बुंदेलखंड में दलबदलुओं से जीत की आस

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फोटो-13बीएनडीपी-1 : बांदा : किरन वर्मा व बृजेश प्रजापति। - फोटो : BANDA
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बांदा। बुंदेलखंड की चटियल और पथरीली धरती पर अबकी चुनाव में दलबदल का खूब जोर रहा। स्थिति कुछ ऐसी हो गई कि दलबदल मौसम हुआ राजनीति का दौर, जिसको जहां मिला टिकट वहीं बना ली ठौर। ज्यादातर अपने दल में वही नहीं टिके जिन्हें टिकट नहीं मिला।
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प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी इन दलबदलुओं को हाथोंहाथ लिया। बरसों पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ऐन चुनावों में छलांग लगाकर पार्टी के पाले में आ गिरे नेताओं को टिकट थमाकर प्रत्याशी बना दिया। बुंदेलखंड के पांच जनपदों की 13 सीटों पर ऐसे नौ प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। ये भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के हैं।
वैसे तो हर चुनाव में पाला बदलना पुरानी परंपरा है। लेकिन अबकी बार बुंदेलखंड में यह कुछ ज्यादा ही नजर आया। टिकट नहीं मिला तो मोहभंग हो गया और दलबदल कर अपना दिखा रहे हैं नया रंग। पाला बदलकर चुनाव लड़ने वालों में मौजूदा विधायक भी शामिल हैं।
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पार्टी हाईकमान द्वारा टिकट न दिए जाने पर रातोंरात निष्ठाएं और आस्थाएं बदल गईं। कई-कई साल के कॅरियर को ठुकराकर नए दल का परचम थाम लिया। इसमें अधिकांश की मुराद भी पूरी हुई। उन्हें दल बदलने का इनाम टिकट के रूप में मिला है।
बांदा : पिछले वर्ष 2017 के चुनाव में तिंदवारी सीट से भाजपा के टिकट पर बृजेश प्रजापति विधायक चुने गए थे। वह अभी भी विधायक हैं। लेकिन उनके राजनीतिक गुरु स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा छोड़कर सपा में चले जाने पर बृजेश ने भी अगले ही दिन भाजपा से इस्तीफा देकर सपा का दामन थाम लिया। उन्हें सपा से तिंदवारी सीट से ही टिकट दे दिया गया है। उधर, बांदा सदर सीट में विवेक कुमार सिंह (अब स्वर्गीय) चार बार कांग्रेस से विधायक हुए। अंत तक वह कांग्रेस में रहे। उनकी पत्नी मंजुला सिंह ने कुछ माह पहले ही सपा की सदस्यता ली थी। सपा हाईकमान ने उन्हें सदर सीट से टिकट देकर प्रत्याशी बनाया है। उधर, नरैनी (सुरक्षित) सीट में बसपा से आईं किरन वर्मा को सपा ने टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा है।
चित्रकूट : यहां की चित्रकूट सदर सीट के बसपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सिंह कांग्रेस से पाला बदलकर बसपा में आए हैं। उन्हें बसपा ने टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया है। जनपद की दूसरी सीट मानिकपुर में भी दलबदल कर आए बलवीर पाल चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव से पहले वह भाजपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए हैं। इसके पहले भी वह बसपा में थे।
हमीरपुर : सदर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे मनोज प्रजापति ने सपा छोड़कर भाजपा का परचम थामा है। यहां इंट्री कराते ही उन्हें टिकट मिल गया। इसके अलावा पिछले 2017 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए अशोक सिंह चंदेल की पत्नी राजकुमारी इस चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी हैं।
महोबा : यहां दो सीटें हैं। महोबा सदर और चरखारी। महोबा सदर में सपा से मनोज तिवारी को टिकट देकर चुनाव लड़ाया जा रहा है। करीब चार माह पहले ही वह कांग्रेस का ‘हाथ’ छोड़कर सपा के साथ आ गए थे। उधर, पूर्व मंत्री व सपा नेता सिद्ध गोपाल साहू को सपा ने टिकट नहीं दिया। अलबत्ता उनके भाई संजय साहू को बसपा ने महोबा से प्रत्याशी बनाया है। सिद्ध गोपाल भाई संजय के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं। हालांकि सपा जिलाध्यक्ष प्रान सिंह यादव का कहना है कि सिद्ध गोपाल को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया जा चुका है।
जालौन : जनपद की कालपी सीट में दलबदल के साथ प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। कालपी सीट पर निषाद पार्टी से चुनाव लड़ रहे छोटे सिंह बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। उसके बाद निषाद पार्टी में आ गए। इसी सीट से सपा ने विनोद चतुर्वेदी को प्रत्याशी बनाया है। वह कांग्रेस छोड़कर सपा में आए हैं। पिछला चुनाव भी उन्होंने कांग्रेस से लड़ा था।
सबसे ज्यादा पलायन कांग्रेस से
टिकट के लिए पाला बदलने में सबसे ज्यादा कांग्रेस के नेता आगे रहे। पांच कांग्रेस नेताओं ने अपनी पार्टी को दगा देकर दूसरे दलों की शरण ली। भाजपा, सपा और बसपा से दो-दो प्रत्याशी दूसरे दलों में गए हैं। उधर, दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट देने में सपा अव्वल है।

फोटो-13बीएनडीपी-2 : जालौन : विनोद चतुर्वेदी व छोटे सिंह। - फोटो : BANDA

फोटो-13बीएनडीपी-3 : हमीरपुर : राजकुमारी चंदेल व मनोज प्रजापति। - फोटो : BANDA

फोटो-13बीएनडीपी-4 : चित्रकूट : बलवीर पाल व पुष्पेंद्र सिंह। - फोटो : BANDA

फोटो-13बीएनडीपी-5 : महोबा : मनोज तिवारी।- फोटो : BANDA

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