संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। आंगनबाड़ी में लाभार्थियों की ई-केवाईसी व फेस कैप्चरिंग में लापरवाही पर डीएम ने मुख्य सेविका सहित 89 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय रोक दिया। इसके अलावा 135 से स्पष्टीकरण मांगा है।
भारत सरकार के बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने पोषण से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता लाने और प्रभावी नियंत्रण के लिए ई-केवाईसी व फेस कैप्चर को अनिवार्य कर दिया गया है। अब सभी आंगनबाड़ी में पंजीकृत लाभार्थियों का प्रमाणीकरण आधार सत्यापन व चेहरा प्रमाणीकरण के तहत होगा। यह काम पांच जून तक पूरा करना था, लेकिन समीक्षा में पाया गया कि लापरवाही के चलते जिले में यह काम आधा भी नहीं हुआ है।
डीएम जे. रीभा के निर्देश पर जिला कार्यक्रम अधिकारी दिलीप कुमार पांडेय ने बाल विकास परियोजना अधिकारियों को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि मुख्य सेविका, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कार्य की प्रतिदिन समीक्षा की जाए। आठ मुख्य सेविकाओं को प्रतिकूल प्रविष्टि, 135 आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
89 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय रोके जाने के निर्देश दिए हैं। कहा कि फेस कैप्चरिंग तथा ई-केवाईसी का कार्य सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा एक सप्ताह अंदर शत- प्रतिशत पूरा किया जाए। अन्यथा मानदेय रोकने सहित सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में खलबली मची है।