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माफिया सरगनाओं से भरी जेल की सुरक्षा में सुराख

Sun, 08 Mar 2015 10:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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प्रदेश के कई कुख्यात माफिया सरगनाओं और आधा दर्जन से ज्यादा खतरनाक दस्यु सरगनाआें और उनके गिरोहों के सदस्यों तथा गुर्गों से भरी पड़ी बांदा मंडल जेल की चहारदीवार (प्राचीर) पुरानी होकर जर्जर हो चुकी है। तीन साल पहले स्वीकृत हुई नई मुख्य बाउंड्री का काम 60 फीसदी होने के बाद ठप हो गया है।
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प्रदेश सरकार ने काम पूरा कराने के लिए बजट की अगली किस्त देने से हाथ खींच लिए हैं। नतीजे में पुरानी जर्जर बाउंड्रीवाल के अंदर ही एक हजार से ज्यादा बंदी कैद हैं। शहर की बस्ती के नजदीक आ चुकी बांदा जेल में दर्जनों कुख्यात अपराधी, माफिया, सरगना और ददुआ, ठोकिया, बलखड़िया आदि गिरोहों के खतरनाक सदस्य कैद हैं।

जेल की सुरक्षा को और पुख्ता बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2011-12 में मौजूदा पुरानी बाउंड्री के बाहर एक और मजबूत और काफी ऊंची नई बाउंड्री के निर्माण को मंजूरी दी थी। तब इसकी लागत 2 करोड़ 96 लाख 58 हजार रुपये आंकी गई थी।
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बाउंड्री निर्माण का काम उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड की बांदा यूनिट को सौंपा गया। इस यूनिट को उपरोक्त मूल लागत की राशि दे दी गई। यूनिट का कहना है कि प्राप्त बजट लगभग पूरा खर्च हो गया है। लेकिन काम सिर्फ 60 फीसदी हो पाया है।

बाउंड्री निर्माण का काम पूरा करने के लिए अब निर्माण निगम ने पुनरीक्षित लागत 5 करोड़ 91 लाख 59 हजार रुपये बताई है। यानी निर्माण निगम को बाउंड्री पूरी करने के लिए अभी 2 करोड़ 94 लाख 61 हजार रुपये और चाहिए।

पुनरीक्षित लागत का इस्टीमेट 2 दिसंबर 2014 को प्रदेश सरकार के सचिव गृह कारागार प्रशासन एवं सुधार को भेजा जा चुका है। लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली। नतीजे में करीब डेढ़ वर्षों से बाउंड्री का काम अधूरा पड़ा है।

निर्माण निगम की बांदा इकाई प्रभारी चंद्रशेखर के मुताबिक 400 मीटर बाउंड्री बनकर रंगाई-पुताई के साथ तैयार हो गई है। 350 मीटर में दूसरी बीम तक काम हुआ है। शेष 309 मीटर में पहली बीम तक काम पूरा हो गया है। अलबत्ता 50 मीटर बाउंड्री का काम अभी शुरू भी नहीं हो पाया है।
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