कार्यदाई संस्था की लापरवाही से 300 बेड वाले निर्माणाधीन संयुक्त जिला चिकित्सालय का काम एक साल और पिछड़ गया है, क्योंकि कार्यदाई संस्था बजट की दूसरी किस्त खर्च ही नहीं कर पाई। नवंबर वर्ष 2012 में 57 करोड़ रुपये की लागत से इसका काम शुरू हुआ था। नवंबर 2015 में इसे पूरा होना था।
मंडल मुख्यालय को 300 बेड के अस्पताल का यह तोहफा बसपा सराकर में मिला था। वर्ष 2012 में जिला अस्पताल के पीछे पड़े खाली मैदान में 56 करोड़ 92 लाख 99 हजार रुपये अस्पताल निर्माण के लिए स्वीकृत हुए। पहली किस्त में शासन ने 15 करोड़ रुपये दिसंबर 2012 में जारी किए।
कार्यदाई संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ने पहले कार्य में तेजी दिखाई। लेकिन बाद में निर्माण कार्य में शिथिलता आ गई। दो साल में महज पिलर खड़े कर भूतल का स्ट्रैक्चर खड़ा हुआ। 15 करोड़ रुपये खर्च के बाद शासन ने वर्ष 2013-14 में आठ करोड़ रुपये और दिए। कार्यदाई संस्था दूसरी किस्त खर्च नहीं कर पाई। नतीजे में वर्ष 2014-15 में शासन ने कोई बजट नहीं दिया।
संस्था की लापरवाही से यह काम करीब एक साल पीछे हो गया। निर्माण स्थल पर लगाए गए बोर्ड में हैंडओवर की तिथि 15 नवंबर 2015 दर्ज है। लेकिन अभी 37 फीसदी काम पूरा नहीं हो पाया है। शासन ने हैंडओवर की अवधि बढ़ाकर अब 16 मार्च 2016 कर दी है। साथ ही समय से काम पूर्ण करने की चेतावनी भी दी है। अब अगले माह नए वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपये और मिलने की उम्मीद है।
अस्पताल निर्माण कर रही राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को भवन निर्माण के लिए 23 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इसमें 21 करोड़ 20 लाख 25 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। निर्माण निगम का कहना है कि काम पूरा करने के लिए 33 करोड़ 92 लाख 99 हजार रुपये और चाहिए।
निगम के मुताबिक चहारदीवारी 60 फीसदी और पाइलिंग तथा बेसमेंट के लिए मिट्टी का काम और बाहरी विकास में ड्रेन का काम पूरा हो गया है। बेसमेंट की छत भी पूरी हो चुकी है। भूतल में 80 प्रतिशत और प्रथम तल में 70 प्रतिशत छत की ढलाई हो गई है। भूतल और बेसमेंट मेें चुनाई का काम चल रहा है। सीसी रोड भी बन रही है।