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सजायाफ्ता की जमानत हाईकोर्ट ने खारिज की

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बांदा। मरौली गांव में प्रधानाध्यापक की गोली मारकर हत्या करने के जुर्म में जेल में बंद अभियुक्त महेंद्र यादव की जमानत उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी। सेशन अदालत से सजा होने के बाद अभियुक्त करीब साढ़े पांच साल से जेल में है।
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मटौंध थाना क्षेत्र के मरौली गांव में स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 21 मार्च 2016 की सुबह करीब साढ़े 11 बजे महेंद्र यादव शराब के नशे में बाइक से विद्यालय पहुंचा और प्रधानाध्यापक राजेंद्र प्रसाद शुक्ला पर तमंचे से दो फायर कर दिए। गोली से घायल प्रधानाध्यापक ने खुद रिपोर्ट दर्ज कराई। 25 मार्च को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। यहां त्वरित न्यायालय पंचम में केस चला।
पीठासीन अधिकारी पवन कुमार शर्मा ने 18 जून 2019 को अभियुक्त महेंद्र यादव को धारा 304 आईपीसी में 10 साल की जेल और 10 हजार रुपये जुर्माना किया। अन्य धाराओं में जेल और जुर्माना किया गया। अभियुक्त 23 मार्च 2016 से जेल में था।
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सजायाफ्ता महेंद्र यादव ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जमानत की अपील की। न्यायमूर्ति प्रीतांकर दिवाकर व न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की बेंच ने सुनवाई की। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें दीं। सुनवाई के बाद बेंच ने अभियुक्त की जमानत अपील खारिज कर दी। मृतक की पत्नी करुणा शुक्ला के अधिवक्ता कामेश्वर सिंह और अभियुक्त के अधिवक्ता आईके चतुर्वेदी रहे।
धारा 304 को 302 में बदलने की याचना
बांदा। प्रधानाध्यापक की पत्नी करुणा शुक्ला ने उच्च न्यायालय में अपील दाखिल कर धारा 304 आईपीसी को धारा 302 में बदलने की याचना की। कहा कि अदालत ने धारा 304 में सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया है। जबकि मामला 302 आईपीसी का था। शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता और करुणा शुक्ला के अधिवक्ता ने दाखिल अपील पर बहस की। अधिवक्ता कामेश्वर सिंह ने बताया कि शीघ्र इस पर भी सुनवाई होगी। धारा 302 पर सुनवाई हुई तो सजायाफ्ता महेंद्र यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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