बांदा। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में लगातार हो रही वृद्धि के चलते अब मालभाड़े में भी 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। इस फैसले का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ने वाला है। खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए महंगाई का बोझ और बढ़ जाएगा।
पिछले 10 दिनों के भीतर पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में चार बार वृद्धि हुई है। इस कारण ट्रांसपोर्टरों के लिए पुराने भाड़े पर माल ढोना संभव नहीं रह गया है। बांदा-लखनऊ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मनोज सिंह के अनुसार डीजल की कीमतों में अचानक आई इस वृद्धि ने ट्रांसपोर्टरों की कमर तोड़ दी है। पहले से ही टोल वृद्धि और सरकारी नियमों के कारण ट्रांसपोर्ट व्यवसाय प्रभावित था, अब डीजल की बढ़ती कीमतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
यह पहली बार है कि पिछले 10 सालों में मालभाड़े में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि यह उनके लिए मजबूरी है, क्योंकि वे घाटे में काम नहीं कर सकते।बांदा में अधिकांश किराना, मेवा, फल और सब्जियां कानपुर व लखनऊ से आती हैं। मालभाड़े में वृद्धि का सीधा मतलब है कि इन वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा होगा। फल-सब्जी के थोक व्यापारी शफीक का कहना है कि मालभाड़ा बढ़ने से बाहर से आने वाले फल और सब्जियों के दाम डेढ़ गुना तक बढ़ सकते हैं।
बढ़ी हुई ट्रांसपोर्ट दरें (प्रति क्विंटल):
स्थान पहले (रुपये) अब (रुपये)
कानपुर 100 125
लखनऊ 110 135
रायबरेली 140 165
विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव
खाद्य पदार्थ : थोक किराना व्यापारी प्रदीप गुप्ता के अनुसार तेल, मसाला, रिफाइंड जैसे खाने-पीने के सामानों की कीमतों में पहले ही 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। मालभाड़ा बढ़ने से इसमें और इजाफा होगा।
अनाज और दालें : गल्ला व्यापार मंडल के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने बताया कि मालभाड़े में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि से अनाज और दालों के दामों में 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
दवाएं : दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष संतोष ओमर का कहना है कि मालभाड़ा बढ़ने से दवाओं की कीमतों में भी पांच प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर गरीब मरीजों पर पड़ेगा।
टोल टैक्स का दोहरा बोझ : ट्रांसपोर्टर पहले से ही टोल टैक्स में भारी वृद्धि से जूझ रहे हैं। बांदा से मुंबई का टोल टैक्स जहां पहले 12 हजार था, वहीं बढ़कर 24 हजार हो गया है। डीजल के दाम बढ़ने से मालभाड़े में हुई वृद्धि इस बोझ को और बढ़ा रही है।