Heartfelt affection, love spilled from the eyes
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बबेरू (बांदा)। यूक्रेन लौटे बेटे से मिलने के लिए बेताब माता-पिता ग्रामीणों के साथ गांव की सीमा पर पहुंच गए। कार से उतरते ही सीने से लाकर खूब दुकार किया। सीने से लगे बेटे के लिए माता-पिता की आसुओं के रूप में प्यार छलकता रहा। माता-पिता से मिलकर बेटे की आंखें भी भर आईं। ग्रामीणों और भाजपाइयों ने छात्र का फूल माला पहनाकर स्वागत किया।
कमासिन ब्लाक की समगरा ग्राम पंचायत के मजरा कोटेदार का डेरा निवासी एमबीबीएस का छात्र आलोक चंद्रा भी यूक्रेन में फंसा था। बुधवार दोपहर चार पहिया वाहन से वह गांव पहुंचा। बेटे की मिलने के लिए आतुर मां माया देवी ,सहायक अध्यापक पिता जगरूप कश्यप ग्रामीणों के साथ औगासी यमुना नदी घाट के पास पहुंच गए। कार से उतरते ही माता-पिता ने बेटे को गले से लगा लिया। तीनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक रहे थे। आलोक ने माता-पिता के चरण छुए। साथ मौजूद भाजपा नेताओं ने आलोक का फूलों की मालाओं से स्वागत किया।
आलोक ने बताया कि 26 फरवरी को साथियों के साथ अपने पैसे से बस की व्यवस्था कर रोमानिया बार्डर पहुंचे। 27 फरवरी को भारतीय दूतावास ने एअर इंडिया की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचाया। दिल्ली में यूपी भवन ले जाया गया। वहां से चार पहिया वाहन पर लखनऊ और लखनऊ से बुधवार को सरकार ने गांव भेजा। आलोक ने कहा कि उसका छह वर्ष का कोई है, यह तीसरा वर्ष था। हालात सामान्य होने पर फिर जाएगा। यूक्रेन में बड़ी संख्या में लोग बंकर में छिपे हैं। आलोक ने भारत सरकार के सहयोग को सराहा।
उधर, भाजपा नेता/प्रत्याशी अजय पटेल सहित विवेकानंद गुप्त, सुखदेव प्रसाद, देवानंद द्विवेदी, राजा दीक्षित, सुनीता भारतीय, श्रीधर गुप्ता भी मौजूद रहे।
तीन सप्ताह का राशन स्टाक कर लिया था
आलोक ने बताया कि तीन सप्ताह का राशन का स्टॉक कर लिया था। खाने-पीने की कोई समस्या नहीं रही। परिवार से रोज फोन पर बात होती थी। बार्डर पार करते समय यूक्रेन के सैनिकों ने हवाई फायरिंग करके दहशत फैलाई। बार्डर पर छात्र-छात्राओं का जमघट था।