बांदा/महोबा। सीमावर्ती मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में बकस्वाहा जंगल को बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों का कारवां बढ़ता जा रहा है। जंगल को कटने से बचाने के लिए देश भर से आवाज उठ रहीं हैं। सोमवार को बुंदेलखंड आजाद सेना ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर बकस्वाहा जंगल बचाने की मांग की। कहा कि हीरा नहीं, आक्सीजन चाहिए। उधर, महोबा में सोमवार को बुंदेलों ने बकस्वाहा जंगल की रक्षा के लिए हवन-पूजन किया।
बांदा में बुंदेलखंड आजाद सेना के प्रमोद आजाद समेत पर्यावरण प्रेमियों ने एसडीएम अवधेश कुमार निगम को दिए ज्ञापन में कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने बकस्वाहा जंगल को आदित्य बिरला ग्रुप एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज को ठेके/लीज में दिया है। वहां वह हीरा खनन कराना चाहती है। 382.131 हेक्टेयर वन क्षेत्र के कटने से 40 से ज्यादा प्रजातियों के लाखों पेड़ कट जाएंगे। दर्जनों गांवों के एक लाख से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे। जंगल में रहने वाले जंगली जानवर तेंदुआ, हिरण, बाघ, बारहसिंघा, चीता आदि पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। पचास साल के लिए लीज में दिए गए जंगल में 6264 हेक्टेयर में हीरा निकलेगा। बकस्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के बैनर तले पर्यावरण प्रेमी व किसान नेता ईश्वरचंद्र त्रिपाठी ने 26 जून से गांधी आश्रम (छतरपुर) में आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
बताया कि आमरण अनशन जारी है। बुंदेलखंड आजाद सेना भी उन्हें समर्थन दे रहा है। पर्यावरण प्रेमियों ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करते हुए बकस्वाहा जंगल को बचाने की मांग की है। ज्ञापन देने में ज्ञानेश्वर प्रसाद, पुष्पेंद्र भास्कर, शिव कुमार विमल, अनेज यादव, अनुरूद्ध यादव, राजेश राष्ट्रवादी, शनि बुंदेला आदि शामिल रहे। उधर, महोबा में बुंदेलों ने पहले बकस्वाहा जंगल जाकर वहां की माटी को चूमा, फिर अपने खून से खत लिखकर प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस तक से बकस्वाहा जंगल को कटने से बचाने के लिए गुहार लगाई। बुंदेलखंड में बुंदेलों ने पेड़ों को रक्षासूत्र बांधकर उनको बचाने का संकल्प लिया।
सोमवार को बुंदेलों ने बकस्वाहा जंगल की रक्षा के लिए हवन पूजन किया। बुंदेलों ने सुबह छह बजे गोरखगिरि में दो हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित गोरखेश्वर महादेव की गुफा में व नीचे शिव मंदिर में बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने अपने साथियों के साथ हवन पूजन किया। सभी लोग अपने गले में ‘बकस्वाहा जंगल को कटने से बचाओ’ की तख्तियां भी टांगे नजर आए। इस मौके पर अवधेश गुप्ता, डा. एलसी अनुरागी, प्रवीण व पंकज चौरसिया, ग्यासी लाल, प्रहलाद पुरवार, शैली व दिलीप नामदेव आदि भी मौजूद रहे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर
महोबा के अलावा छतरपुर में हरित सत्याग्रह कर रहे समाजसेवी अमित भटनागर, शरद कुमार, फतेहपुर में बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के प्रमुख ई. प्रवीण पांडेय, बांदा में बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के महामंत्री डाल चंद्र मिश्रा, चित्रकूट में पर्यावरणविद् राम बाबू तिवारी, प्रवीण उपाध्याय व हमीरपुर में बुंदेलखंड क्रांति दल के सत्येंद्र अग्रवाल व बुंदेलखंड नवनिर्माण सेना के प्रमुख विनय तिवारी ने हवन पूजन कर ईश्वर से प्रार्थना की कि 30 जून को एनजीटी व एक जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में बकस्वाहा जंगल को कटने से बचाने के पक्ष में फैसला हो।