विधानसभा चुनाव में वोटिंग के प्रति मतदाताओं का रुझान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। जिले की चारों विधान सभा क्षेत्रों में 61 फीसदी से ज्यादा मतदान कभी नहीं हुआ। नरैनी (सुरक्षित) में एक बार मात्र 19 फीसदी मतदाता ही बूथों तक पहुंचे। विधानसभा के अब तक हुए एक दर्जन से ज्यादा चुनावों में मतदान का ग्राफ ज्यादातर 50 फीसदी से कम ही रहा। कुछ बार ही मतदान प्रतिशत ने 50 की सीमा पार की है।
1952 के पहले विधान सभा चुनाव में नरैनी सीट पर मात्र 19 फीसदी वोट पड़े थे। बांदा में 26 और बबेरू में 29 प्रतिशत मतदान हुआ था। 1957 में बांदा में 35, बबेरू में 34 और नरैनी में 29 प्रतिशत वोट पड़े। 1962 में बांदा में 36, बबेरू में 42 और नरैनी में 37 प्रतिशत मतदान हुआ। 1967 में बांदा में 41, बबेरू में 55 और नरैनी में 52 प्रतिशत वोट पड़े। 1974 में तिंदवारी विधान सभा क्षेत्र गठित हो जाने के बाद जनपद में विधान सभा क्षेत्रों की संख्या बढ़कर चार हो गई। इस बार चारों सीटों पर 50 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ। बांदा में 61, बबेरू में 66, नरैनी में 61 और तिंदवारी में 58 प्रतिशत वोट पड़े। 1977 में भी आधे से अधिक मतदाताओं ने वोट डाले। बांदा में 58, बबेरू में 60, नरैनी में 56 और तिंदवारी में 55 फीसदी मतदान हुआ। 1980 में बांदा में 46, बबेरू में 60, नरैनी में 51 और तिंदवारी में 42 प्रतिशत वोट डाले गए।
1985 से मतदान के ग्राफ में गिरावट शुरू हो गई। इस चुनाव में बांदा में 34, बबेरू में 43, नरैनी में 37 और तिंदवारी में 38 फीसदी वोट पड़े। 1989 में मतदान का ग्राफ कुछ तो बढ़ा लेकिन 50 फीसदी से पहले ही ठहर गया। बांदा और बबेरू में 47-47, नरैनी में 49 और तिंदवारी में 48 प्रतिशत मतदान हुआ। 1991 के चुनाव में भी मतदाताओं ने पुराना रवैया बरकरार रखते हुए मतदान का ग्राफ 50 फीसदी नहीं होने दिया। बांदा में 40, बबेरू में 42, नरैनी में 46 और तिंदवारी में 36 फीसदी वोट डाले गए। लगभग डेढ़ दशक बाद 1993 के चुनाव में चारों सीटों पर मतदाताओं ने एक बार फिर मतदान का ग्राफ 50 फीसदी पार कर दिया। बांदा में 52, बबेरू में 54, नरैनी में 58 और तिंदवारी में 51 फीसदी डाले गए।
1996 में बांदा में 44, बबेरू में 54, नरैनी में 58 और तिंदवारी में 50 फीसदी मतदान किया गया। वर्ष 2002 के चुनाव में बांदा में 43, बबेरू में 55, नरैनी और तिंदवारी में 53-53 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। 2007 में फिर मतदान में गिरावट आई और कहीं भी 50 फीसदी वोट नहीं पड़े। आंकड़ा 40 पर ही ठहर गया। बांदा और नरैनी में 40-40, बबेरू में 39 और तिंदवारी में 35 प्रतिशत वोट पड़े। पिछले 2012 में मतदान का ग्राफ कुछ तो बढ़ा लेकिन 55 फीसदी पर ही ठहर गया। तिंदवारी में 57, बबेरू में 54, नरैनी में 55 और बांदा सदर विधान सभा क्षेत्र में 56 फीसदी मतदाताओं ने ही वोट डाले।