फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक्सक्लूसिव: 34 मंदिरों के भगवानों के पास नहीं है आधार कार्ड, अधिकारी बोले बिना आधार नहीं बिकेगी फसल

Fri, 04 Jun 2021 01:39 PM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में भगवान का आधार कार्ड न होने का एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण और लक्ष्मी-नारायण के आधार कार्ड नहीं हैं। इनके मंदिरों में पैदा हुआ गेहूं बेचने में यह सरकारी शर्त आड़े आ गई है। तर्क दिया जा रहा कि जिसके नाम जमीन है, उसी का आधार कार्ड हो, तभी रजिस्ट्रेशन होगा।
विज्ञापन


नतीजे में चित्रकूटधाम मंडल के 34 मंदिरों में 445 हेक्टेयर जमीन में पैदा हुए गेहूं की बिक्री सरकारी खरीद केंद्रों में अटक गई है। अधिकारियों ने बगैर रजिस्ट्रेशन गेहूं खरीद से मना कर दिया है। कहा कि मंदिरों से संबद्ध जमीनों का गेहूं खरीदने को रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है, जबकि रजिस्ट्रेशन के लिए आधार जरूरी है। चित्रकूटधाम मंडल के सरकारी खरीद केंद्रों में इन दिनों गेहूं की खरीद चल रही है।

आम किसान तो तमाम जद्दोजहद और कई-कई दिन इंतजार के बाद बमुश्किल अपनी फसल यहां बेच पा रहे हैं, लेकिन धार्मिक स्थलों के नाम दर्ज भूमि में हुई फसल सरकारी शर्तों में फंस गई है। गेहूं बेचने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन कराना होता है। यह रजिस्ट्रेशन उसी के नाम होता है जिसके नाम जमीन है। मंदिर या अन्य धार्मिक स्थलों की भूमि संबंधित धार्मिक स्थल के नाम ही अभिलेखों में दर्ज है। खरीद में यही पेच फंस गया है।
विज्ञापन


इन देवताओं या धार्मिक स्थलों के नाम आधार कार्ड नहीं बने हैं। कंप्यूटरीकृत सिस्टम से हो रहे रजिस्ट्रेशन में शर्त है कि खतौनी में दर्ज भूमि मालिक के नाम का ही आधार कार्ड होना चाहिए। अधिकारियों ने शासनादेश का हवाला देते हुए बगैर रजिस्ट्रेशन के अनाज खरीदने से इनकार कर दिया है। मजबूरन संरक्षकों को अब मंदिर की जमीन में पैदा हुए गेहूं को बाजार में औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है।

अतर्रा तहसील के खुरहंड गांव में स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर के संरक्षक राम कुमार दास का कहना है कि मंदिर में 40 बीघा जमीन भगवान राम-जानकी के नाम अभिलेखों में दर्ज है। सरकारी क्रय केंद्रों में गेहूं बेचने के लिए पहले तो रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा था। रजिस्ट्रेशन किसी तरह हो गया तो एसडीएम सत्यापन नहीं कर रहे। उनका कहना है कि जमीन मालिक का आधार लाओ। अब भगवान का आधार कार्ड से कहां से लाएं।
 

आधार कार्ड - फोटो : pixabay
नरैनी तहसील के आऊ गांव में स्थित मंदिर की 30 बीघा जमीन अभिलेखों में भूमिहीन सेवा समिति के नाम दर्ज है। संरक्षक/पूर्व आईएएस ललित उनियाल ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्रों में गेहूं बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है। रजिस्ट्रेशन में समिति का आधार मांगा जा रहा है। बताया कि समिति का कोई आधार कार्ड नहीं होता है। अधिकारी भी कुछ नहीं कर रहे।

शासन को कराया गया अवगत
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के तहत रजिस्ट्रेशन के समय खतौनी में दर्ज किसान/मालिक का आधार कार्ड मांगता है। संरक्षक का आधार लगाने पर वह सबमिट नहीं करता। इसके लिए शासन को अवगत कराया गया है।
संजीव कुमार, संभागीय खाद्य नियंत्रक, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा

बिना रजिस्ट्रेशन नहीं करेंगे सत्यापन
शासनदेश में यह व्यवस्था है कि गेहूं किसान का ही खरीदा जाएगा। रजिस्ट्रेशन के दौरान जिसके नाम जमीन है उसे अपना आधार देना होगा। यदि किसी तरह रजिस्ट्रेशन हो गया तो वह सत्यापन नहीं करेंगे।
सौरभ शुक्ला, उपजिलाधिकारी, अतर्रा

बिना आधार नहीं होता रजिस्ट्रेशन
कंप्यूटर में ऊपर से ही यह व्यवस्था है कि रजिस्ट्रेशन में साफ्टवेयर जमीन मालिक का आधार मांगता है। आधार नहीं है तो रजिस्ट्रेशन ही नहीं होता है। इसकी जानकारी अधिकारियों को दी जा चुकी है।
समीर सिंह, विपणन निरीक्षक, अतर्रा

महोबा के 15 मंदिरों की है सैकड़ों हेक्टेयर भूमि
महोबा जिले के 15 मंदिर ऐसे हैं, जिनके नाम सैकड़ा हेक्टेयर भूमि है। कुछ भूमि पर मंदिर के सर्वराकार स्वयं खेती कराते हैं, तो कुछ जमीन को बलकट व नीलामी से दिया जा रहा है। महोबा तहसील के रैपुरा कला गांव के प्राचीन रामजानकी मंदिर की 5.83 हेक्टेयर भूमि पर खेती हो रही है।

पवा गांव के ठाकुर महाराज मंदिर की 0.943 हेक्टेयर भूमि पर नीलामी कराई जाती है। पनवाड़ी के रामजानकी मंदिर के नाम 30 हेक्टेयर भूमि पर महंत राजेंद्र दास स्वयं खेती कराते हैं। ब्लॉक चरखारी के कुरौराडांग गांव के रामजानकी मंदिर की 405 हेक्टेयर, काकुन स्थित बजरंग बली मंदिर की 31.4 हेक्टेयर, मझोल के बांके बिहारी मंदिर की 16 हेक्टेयर, रामजानकी मंदिर कुआं की तीन हेक्टेयर व खरेला के महामुनि श्रृंगी श्रृषि आश्रम की 12 हेक्टेयर भूमि पर फसल की पैदावार की जा रही है।

जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी रामकृष्ण पांडेय का कहना है कि जिले में अभी तक मंदिर के नाम भूमि की फसल क्रय केंद्रों में बेचने का कोई मामला सामने नहीं आया है, क्योंकि फसल बेचने के लिए किसान का पंजीयन नंबर, आधारकार्ड आदि की जरूरत होती है। 

 
विज्ञापन

एक दर्जन मठ-मंदिरों के नाम सैकड़ों बीघा भूमि
चित्रकूट धर्मनगरी में एक दर्जन से अधिक मठ मंदिरों के नाम पांच से 40 बीघा तक खेतिहर भूमि है। जरूरत के हिसाब से अनाज को बाजार में बेचा जाता है। बड़ा अखाड़ा खोही मठ 20 बीघे में खेती करवाता है। रामशैय्या के श्रीराम जानकी मंदिर की लगभग चार बीघा, नांदिन के हनुमान मंदिर की लगभग 15 बीघा, बालाजी मंदिर सीतापुर की 25 बीघे, लड्डू गोपाल मंदिर बिहरवां की लगभग तीन बीघे और बरमपुर के राधाकृष्ण मंदिर की लगभग 15 बीघे की भूमि में फसल की पैदावार की जाती है।

अधिकतर फसल का उपयोग मठ मंदिरों में हो जाता है, ज्यादा होने पर बाजार में बेचा जाता है। भरत मंदिर के महंत दिव्यजीवन दास का कहना है कि खेतों की उपज ज्यादातर सालभर उनके यहां चलने वाले धार्मिक कार्य या भंडारे में ही खर्च हो जाती है। बहुत कम उपज बाजार में बेची जाती है। उधर, डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने कहा कि फिलहाल ऐसा मामला नहीं आया है। अनाज बेचने व भुगतान पाने वाले का नाम खतौनी में होना अनिवार्य होता है। (संवाद)

26 धार्मिक स्थलों की 104 एकड़ खेतिहर भूमि
हमीरपुर जिले में करीब 26 धार्मिक स्थलों में 104 एकड़ खेतिहर जमीनें हैं। मंदिरों के नाम ज्यादातर जमीनों को गठित समितियां या ग्राम पंचायतें ही ठेके पर बलकट के रूप में उठा रही हैं। राठ के टोला गांव स्थित रामजानकी मंदिर के नाम दो एकड़ जमीन है। जिसकी देखरेख ग्रामसभा कर रही है।

चुने गए प्रधान ही बलकट में जमीन उठा रहे हैं। धर्मेंद्र गुप्ता ने बताया कि रामजानकारी मंदिर की दो एकड़ जमीन में 35 क्विटल गेहूं पैदा हुआ है। उन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया, पर अभी नंबर नहीं आया है। पत्योरा गांव में प्राचीन रामजानकी मंदिर के नाम चार एकड़ जमीन है। तीन एकड़ जमीन यमुना नदी की तलहटी में होने से परती है। सिर्फ एक एकड़ जमीन को बटाई पर दे दी जाती है। उजनेड़ी के आशीष दीक्षित ने बताया कि मंदिर की जमीन में होने वाली पैदावार में 10 क्विंटल अनाज प्रतिवर्ष पुजारी को देते हैं। 

130 एकड़ में 2500 क्विंटल गेहूं की पैदावार
जालौन जिले में करीब 30 से 35 छोटे-बड़े धार्मिक स्थल ऐसे हैं, जिनकी जमीनों पर खेती भी की जाती है। जिले में धार्मिक स्थलों की करीब 130 एकड़ जमीनें हैं। इनमें इस बार भी गेहूं की फसल बोई गई थी। अबकी लगभग 2500 क्विंटल गेहूं की पैदावार हुई है।

जिला विपणन अधिकारी विकास तिवारी ने बताया कि इन खेतों का मालिकाना हक धार्मिक स्थलों के ट्रस्ट या समिति का होता है। लिहाजा इसमें होने वाली पैदावार को ट्रस्ट का प्रोपराइटर ही बिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकता है। वैसे अधिकांश जमीनों को ट्रस्ट ने बटाईदारों को दे रखा है, लिहाजा वे बटाईदार ही पैदावार की बिक्री करते हैं। इसमें बाधा नहीं आती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें