कृषि भूमि के बैनामे में की गई धोखाधड़ी और साजिशन दाखिल-खारिज कर निरस्त कर दिए जाने के विरोध में महिला अपने पति, पुत्रियों व पुत्र के साथ आमरण अनशन पर बैठ गई है।
सोमवार से यहां स्वतंत्रता स्मारक अशोक लाट पर अनशन पर बैठी सुनीता उर्फ उमा देवी ने बताया कि वर्ष 2012 में उसने गांव के एक व्यक्ति से 2.20 लाख रुपये में कृषि भूमि खरीदकर बैनामा कराया था। इसका दाखिल खारिज भी हो गया।
जमीन बेचने वाले ने यह बात छिपा ली थी कि उस पर किसान क्रेडिट कार्ड का 80,970 रुपये बकाया है। इसी बीच गांव के कुछ लोगों ने साजिशन नरैनी तहसीलदार के यहां जमीन बंधक होने संबंधी शिकायत करके दाखिल खारिज निरस्त करने की मांग की।
इस पर सुनीता ने बैंक का बकाया 80,970 रुपये भी जमा कर दिया। बंधक मुक्ति प्रमाण पत्र बैंक से लेकर तहसीलदार के यहां जमा कर दिया। इसके बाद भी तहसीलदार ने दाखिल खारिज निरस्त कर दिया।
सुनीता ने बताया कि लगभग 5 लाख रुपये खर्च हो चुका है। उसकी बोई फसल भी कटवा ली गई। सुनीता की मांग है कि तहसीलदार सहित लेखपाल और इस साजिश में शामिल चार अन्य लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए। आमरण अनशन पर सुनीता के साथ उसका पति बलदाऊ शिवहरे, 16 वर्षीय पुत्र कविता, 13 वर्षीय गीतांजलि और 11 वर्षीय पुत्र पवन भी बैठा है।