बांदा। करीब 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी मामले में नामजद पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल को अग्रिम जमानत नहीं मिली। जिला सेशन न्यायाधीश ने उनकी अर्जी खारिज कर दी। पूर्व सांसद ने दलील दी थी कि उनका राजनैतिक भविष्य खराब करने के लिए फर्जी मुकदमे की साजिश की जाती है।
पीडब्ल्यूडी ठेकेदार रमाकांत त्रिपाठी ने 11 अक्टूबर को शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने चाचा भानू प्रताप चतुर्वेदी के कहने पर बालू खदान में पार्टनरशिप के लिए पूर्व सांसद के खाते में पांच लाख रुपये भेजे। पूर्व सांसद की बात पर भरोसा करके उसके साथी रुद्र प्रकाश ने 10 लाख, सत्येंद्र शुक्ला ने 20 लाख और योगेश पांडेय ने 9 लाख रुपये 28 मई 2018 को डाक बंगले में दिए।
इसके बाद 16 लाख रुपये और खाते में भिजवाए। बाद में पता चला कि बालू खदान की कोई फाइल ही नहीं बनी है। ठेकेदार रमाकांत ने रिपोर्ट में यह भी कहा था कि कुछ लोग उसके घर में आकर धमकी दे गए कि पूर्व सांसद को दिया पैसा भूल जाओ वरना ठीक नहीं होगा। पुलिस ने पूर्व सांसद के खिलाफ धारा 419, 420,406 आईपीसी की रिपोर्ट दर्ज की थी।
पूर्व सांसद ने अधिवक्ता के माध्यम से सेशन न्यायाधीश की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी। इसमें कहा था कि वह शांतिप्रिय व्यक्ति हैं। किसी प्रकरण में दोष सिद्ध नहीं हैं। राजनैतिक लोग चुनाव के चलते बुराई मानते हैं और राजनीतिक भविष्य खराब करने के उद्देश्य से फर्जी मुकदमे करने की साजिश करते हैं।
बताया कि वापस किया पैसा जमीन का था। शेष पैसा न देने के उद्देश्य से झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। गुरुवार को सुनवाई के बाद सेशन न्यायाधीश गजेंद्र कुमार ने तथ्यों और पुलिस विवेचक की आख्या के मद्देनजर अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दी।