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बाढ़ से राहत, पर कम नहीं आफत

Wed, 24 Aug 2016 11:32 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
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कनवारा गांव में बाढ़ पीड़ितों को लंच पैकेट बांटते स्वयंसेवी। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। दर्जनों गांवों में तबाही मचाने के बाद यमुना और केन का जलस्तर घटने लगा है। हालांकि चिल्ला घाट पर अभी भी यमुना खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर है, पर पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। केन खतरे के निशान से तीन मीटर घटकर 101 मीटर पर आ गई है। बरियारपुर और गंगऊ बांधों के जलस्तर में भी भारी कमी आई है। पानी घटने के बाद भी आफत कम नहीं हुई है।
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केन की बाढ़ सिमट जाने के बाद खंडहर और दलदल में तब्दील गांवों में पीड़ित लौटने लगे हैं। प्रशासन की ओर से उन्हें फिलहाल कुछ खास मदद नहीं मिली है। बांटी गई पॉलीथिन, लंच पैकेट और अन्य खाद्य सामग्री सभी पीड़ितों को नहीं मिल पाई। राजनीतिक और स्वयंसेवी संगठनों के लोग यहां राशन पहुंचा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग भी सिर्फ रस्म अदायगी कर रहा है। पशुओं के लिए भूसा भी नाममात्र बांटा जा रहा है।

घर गिरने से बेघर हुए लोग आसमान तले या पॉलीथिन की छाया बनाकर ठहरे हैं। बड़ी संख्या में बाढ़ पीड़ित अभी भी ऊंचाई वाले स्थानों या सड़कों किनारे शरण लिए हैं। ब्रह्मा डेरा के राममूरत निषाद, दुर्जी पत्नी छोटे निषाद, चुन्नी पत्नी विष्णु निषाद और कल्लू निषाद ने बताया कि उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिली। भगवान भरोसे शरण लिए हैं।
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प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए लंच पैकेट बनवाने का ठेका कई दिन पहले शुरू कर दिया। शायद 30 रुपये प्रति लंच पैकेट का भुगतान किया जा रहा है, जबकि राजनीतिक दलों या स्वयंसेवी संगठनों द्वारा तैयार किए जा रहे पैकेट प्रशासन के पैकेटों से बेहतर होने के बाद भी सस्ते हैं। लंच पैकेट बांट रहे बसपा नेताओं ने बताया कि 18 रुपये में पर्याप्त खाद्य सामग्री का लंच पैकेट तैयार हो रहा है।

दरदा, कनवारा, चटगन, रघुवंशीडेरा आदि गांवों में बुधवार को राजनीतिक दलों और स्वयंसेवियों ने लंच पैकेट बांटे। भाजपा प्रदेश कार्यकरिणी सदस्य प्रकाश द्विवेदी ने पैकेट उपलब्ध कराए। नीरज शुक्ला, लाला भइया, सुशील द्विवेदी, रवि रुपौलिहा, अजय पटेल, आशीष यादव, विजय करन प्रसाद, अशोक गुप्ता भी शामिल रहे।


सौ से अधिक मकान धराशायी
मटौंध। बारिश में सौ से अधिक मकान ढह गए। उधर, थाने के पीछे नेशनल हाईवे पर बनी टूटी पुलिया का पानी घरों में घुस जाने से तबाही मची है। किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने सुध नहीं ली। पीडब्ल्यूडी ने पुलिया में बड़े-बड़े पत्थर डालकर पानी का निकास बंद कर दिया। जलभराव से मकान धराशायी हो गए। नगर पंचायत अध्यक्ष बिंदादीन पाल का कहना है कि जितनी गुंजाइश थी, उतनी सफाई करा दी गई। पुलिया निर्माण के बाद ही समस्या का निदान होगा। इस बारे में डीएम को भी अवगत कराया जा चुका है।

कांग्रेसियों की टीम बाढ़ पीड़ितों से मिली
बांदा। कांग्रेस की टीम ने जसपुरा ब्लाक के छोटा खोड़, बड़ा खोड़, नारायण डेरा, पातालेश्वर डेरा आदि का दौरा किया। जिलाध्यक्ष अखिलेश शुक्ला ने बताया कि यहां 15 दिनों से ग्रामीण बाढ़ में पानी से घिरे हैं। कोई अधिकारी या कर्मचारी यहां नहीं पहुंचा। न ही राशन सामग्री पहुंचाई गई।

बीमार कई लोगों को हमीरपुर के भरुवा सुमेरपुर ले जाकर इलाज कराना पड़ा। गड़रिया में पानी उतर जाने के बाद सड़ांध मची है। जत्थे में अध्यक्ष के साथ शशि अवस्थी, शिवदत्त अग्निहोत्री, ब्रह्मदत्त द्विवेदी, उमाशंकर भी शामिल रहे।

आपूर्ति 24 घंटे से ठप
बड़ोखर बुजुर्ग। खुरहंड पावर हाउस से आई लाइन के तीन पोल शिवहद नाला के पास जल भराव होने के कारण गिर गए। 33 केवीए के ये बिजली पोल गिरने से अर्जुनाह, गिरवां, बड़ोखर बुजुर्ग, निवादा मलेहरा समेत आसपास के आधा सैकड़ा गांव की आपूर्ति 24 घंटे से ठप है। जेई राजेश कुमार व कर्मचारी आशीष, राजकुमार, संजय आदि की टीम पोल दुरुस्त करने देर शाम पहुंची। लेकिन आपूर्ति नहीं शुरू हो सकी।
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