बांदा। प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना कर रहा है। साथ ही बाढ़ पीड़ितों की सेहत से खिलवाड़ भी किया जा रहा। बाढ़ पीड़ितों को प्रतिबंधित पॉलिथीन में गर्म पूड़ी और सब्जी पैक कर लंच पैकेट दिए जा रहे हैं। इसमें भारी मात्रा में पॉलिथीन का इस्तेमाल हो रहा है। खाली होने पर फेंकी जा रही पॉलिथीन भूखे अन्ना पशु खा रहे हैं। उन पर भी मौत का खतरा मंडरा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने पॉलिथीन के इस्तेमाल पर कड़ाई से रोक लगा रखी है। इसका शासनादेश भी जारी हो चुका है। पिछले दिनों सिटी मजिस्ट्रेट और कुछ अन्य प्रशासनिक अफसरों ने बाजार में बिक रही पॉलिथीन बरामद कर जब्त की थी। इसका इस्तेमाल करने वालों को कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी लेकिन अब बाढ़ राहत की आड़ में प्रशासन सुप्रीम कोर्ट और शासन के आदेशों को ठेंगा दिखा रहा है।
जिले के आला अफसर खुद पॉलिथीन के पैकेट अपने हाथों बांट रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों को दिए जा रहे लंच पैकेट किसी कागज या डिब्बे के बजाय सस्ती पॉलिथीन की थैलियों में पैक कर दिए जा रहे हैं। पॉलिथीन में लंच पैकेट दिया जाना बाढ़ पीड़ितों की सेहत से खिलवाड़ भी है। गर्म पूड़ी, सब्जी और तीखे अचार पॉलिथीन में रखे जाने से इसमें केमिकली रिएक्शन होता है।
खाना जहरीला हो जाता है। बाढ़ के पहले ही दिन सदर तहसील में पॉलिथीन में पैक 400 लंच पैकेट सड़ गए थे। प्रशासन ने इस पर लीपापोती की थी। पॉलिथीन में खाना पैक करना कितना नुकसानदेह है, इसकी तस्दीक चिकित्सक भी करते हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एसडी त्रिपाठी ने बताया कि पॉलिथीन में गर्म खाना पैक किए जाने से यह जहरीला हो जाता है। पॉलिथीन में ‘पालीथिलीन क्लाईकोरीन’ नामक केमिकल होता है।
गर्म चीज रखने से प्लास्टिक और केमिकल का तत्व उतर जाता है। डाक्टर ने बताया कि इससे कैंसर और लीवर में गड़बड़ी जैसे रोग भी हो सकते हैं। उधर, गांवों में बाढ़ पीड़ित पैकेट से भोजन निकाल कर पॉलिथीन फेंक रहे हैं। तेल-मसाला लगा होने से भूखे-प्यासे घूम रहे अन्ना पशु पॉलिथीन खा रहे हैं। उन पर भी मौत का खतरा मंडरा रहा है।
प्रतिबंध की लिखित जानकारी नहीं : एडीएम
बांदा। पॉलिथीन पर पाबंदी के लिए धरपकड़ कर चुके प्रशासनिक अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन की बात पर हैरत भरा जवाब दिया। एडीएम/प्रभारी दैवी आपदा गंगाराम गुप्ता बोले प्रतिबंध के बारे में उनके पास न तो कोई लिखित आदेश है न गाइड लाइन। एडीएम ने सुप्रीम कोर्ट और शासनादेश के उल्लंघन पर कहा कि आपदा पीड़ितों की मदद की जा रही है। इसमें मीन-मेख निकालना गलत है। खर्च करने की सीमा है, इसलिए कागज की जगह पॉलिथीन प्रयोग करना मजबूरी है।