बांदा। बाढ़ का सितम और बढ़ गया है। यमुना और केन नदियों का कहर जारी है। दो दर्जन से ज्यादा गांव पूरी तरह बाढ़ से घिर गए हैं। बांदा से कानपुर, फतेहपुर, लखनऊ के मुख्य मार्गों पर कई फीट पानी भर जाने से आवागमन ठप हो गया है। यमुना खतरे के निशान से ढाई मीटर ऊपर हो गई है।
उधर, केन नदी भी खतरे का निशान पार कर गई है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक यमुना का जलस्तर अभी और बढ़ेगा। केन नदी के देर रात स्थिर होने का अनुमान जताया गया है। उधर, गंगऊ और बरियारपुर बांधों से 1,20,000 क्यूसेक पानी केन नदी में डिस्चार्ज हो रहा है।
यमुना नदी की बाढ़ से जिले की पैलानी और बबेरू तहसीलों के दो दर्जन से ज्यादा गांव संकट में आ गए हैं। गांवों की बस्तियों में पानी जा घुसा है। दर्जनों कच्चे मकान धराशायी हो गए हैं। गांवों के कच्चे-पक्के रास्ते पानी में डूब गए हैं। परिषदीय स्कूल भवन भी जलमग्न हो जाने से पढ़ाई ठप हो गई है।
खप्टिहा कलां प्रतिनिधि के मुताबिक केन नदी किनारे आबाद सेमरा डेरा, छनिहा डेरा, शिवपाल डेरा और पंडितन डेरा आदि में बाढ़ की दहशत है। यहां के लोग सामान और पशु लेकर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि फिलहाल क्षेत्रीय लेखपाल ही जायजा लेने आया है। चिल्ला प्रतिनिधि के मुताबिक बांदा-बहराइच स्टेट हाईवे पर बने दोनों पक्के पुलों के काफी नजदीक यमुना का जल स्तर पहुंच गया है। चिल्ला से बांदा और ललौली दोनों ही मार्गों पर बाढ़ का पानी भर जाने से चिल्ला, सादीमदनपुर आदि का सड़क मार्ग बंद हो गया। यहां से होकर कानपुर, फतेहपुर, लखनऊ जाने वाले वाहन भी ठप हो गए। उधर, खजुरी गांव भी पानी से घिर गया है।
उधर, यमुना और केन दोनों ही नदियों में जल स्तर बढ़ने का सिलसिला थम नहीं रहा। चिल्ला घाट में यमुना नदी गुरुवार को देर शाम 102.50 मीटर पैमाने पर पहुंच गई। यह खतरे के निशान से ढाई मीटर ऊपर है। खतरे का निशान 100 मीटर है। इसी तरह केन नदी देर रात खतरे का निशान 104 मीटर पार कर गई।
केंद्रीय जल आयोग के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि यमुना के जलस्तर में अभी और वृद्धि की संभावना है, जबकि केन नदी का जल स्तर अब स्थिर होने का पूर्वानुमान है। गुरुवार को गंगऊ बांध से 1,72,981 और बरियारपुर से 1,69,050 क्यूसेक पानी केन नदी में गिरता रहा। 24 घंटे में यह डिस्चार्ज एक लाख क्यूसेक से ज्यादा बढ़ा है। बुधवार को गंगऊ में 67,209 और बरियारपुर से 49,117 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज था।
यमुना और केन की एक साथ बाढ़ खतरे की घंटी
बांदा। केन और यमुना में एक साथ उफान खतरे की घंटी है। मध्य प्रदेश से शुरू हुई केन चिल्ला घाट में यमुना नदी में जा मिली है। केन की बाढ़ का सारा पानी यमुना में ही समाता है। ऐसे में उफनाई यमुना में केन नदी का पानी समायोजित होने में बाधा आएगी। नतीजे में केन का पानी निचले इलाकों में फैलकर बाढ़ की स्थिति गंभीर कर सकता है। ब्यूरो
बबेरू क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों ने स्कूल में ली शरण
बबेरू। यमुना नदी की बाढ़ से इस क्षेत्र के औगासी, कायल, जलालपुर, मरका, समगरा, मिर्जापुर, अछरील, औदहा, मटेहना, खेरा, खटान, चरका, मुड़वारा, लखनपुर आदि गांव प्रभावित हैं। कई गांवों के रास्ते डूब गए हैं। बस्तियों में पानी पहुंच रहा है। अछरील गांव में 26 परिवारों को उनके घरों से हटाकर परिषदीय स्कूल में ठहराया गया है। कई परिवारों ने अपना सामान ऊंचे स्थानों या छतों पर रख दिया है।
फतेहपुर, बघेला, काजीटोला, औगासी और तिंदवारी का सड़क आवागमन बाधित है। गुरुवार को क्षेत्रीय विधायक चंद्रपाल कुशवाहा ने औगासी, कायल आदि गांवों का जायजा लिया। उधर, एसडीएम महेंद्र प्रताप और तहसीलदार विपिन कुमार ने अछरील, खेरा, दादौं, बरौली, राघवपुर आदि गांवों का निरीक्षण कर बाढ़ की स्थिति देखी। ब्यूरो
डीएम-एसपी नाव पर, दो दिन में किसानों को सहायता
बांदा/तिंदवारी। यमुना किनारे आबाद बेंदा गांव में आई जबरदस्त बाढ़ का गुरुवार को डीएम हीरा लाल और एसपी गणेश साहा ने नाव पर बैठकर निरीक्षण किया। एसडीएम संदीप कुमार और तहसीलदार अवधेश निगम तथा बीडीओ पीयूष मोहन श्रीवास्तव भी थे। बाढ़ पीड़ितों को बिस्किट, गुड़, चना आदि बंटवाया गया। साथ ही सदर तहसील में चल रही नेकी की दीवार में एकत्रित किए गए कपड़े भी बांटे गए।
जिलाधिकारी ने बाढ़ पीड़ितों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि हर संभव सहायता की जाएगी। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित बबेरू व पैलानी तहसीलों को तहसीलदारों को निर्देश दिया गया है कि डूबी हुई फसलों का सर्वे करके दो दिन के अंदर प्रभावित किसानों के खाते में सहायता राशि भेजना सुनिश्चित करें।
अन्य प्रभावितों को भी राहत प्रदान की जाएगी। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस को सतर्क कर दिया गया है। एक प्लाटून पीएसी भी तैनात कर दी गई है। निरीक्षण के दौरान डीएम एसपी के साथ ग्राम विकास अधिकारी ललित कुमार और प्रधान प्रतिनिधि विवेक कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
बाढ़ पीड़ित भगवान भरोसे, नहीं पहुंच रही मदद
खप्टिहा कलां। बाढ़ प्रभावित इलाकों में सरकारी मदद नहीं पहुंच रही। ग्रामीण समस्याओं से जूझ रहे हैं। पैलानी क्षेत्र के छनिहा डेरश के जगन्नाथ निषाद व रामसजीवन, सैमरा डेरा के रामचरन निषाद आदि ने बताया कि पिछले 15 दिनों से बिजली आपूर्ति ठप है। बाढ़ और बारिश अंधेरे में बीत रही है। मोबाइल फोन भी नहीं चार्ज हो पा रहे। जिससे प्रशासन या किसी अन्य से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा। बीमारों को इलाज भी नहीं मिल रहा। कोई स्वास्थ्य कर्मी नहीं पहुंचा।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगाईं
बांदा। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगाई गई हैं। डीएम के निर्देश पर चार टीमें गठित की गई है। इनमें सीएमओ डा.संतोष कुमार, अपर सीएमओ डा. बीपी वर्मा और डिप्टी सीएमओ डा. एमसी पाल आदि शामिल हैं। इन सभी को अलग-अलग गांवों में भेजा गया है। उनके साथ दवाएं भी भेजी गई हैं।
स्ट्रीमिंग कमेटी ने की बाढ़ की समीक्षा
बांदा। जनपद में बाढ़ के बीच गुरुवार को कलक्ट्रेट में बाढ़ स्ट्रीमिंग कमेटी की बैठक में समीक्षा की गई। अध्यक्षता कर रहे जिलाधिकारी हीरा लाल ने उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत कैंप और बाढ़ चौकियां संचालित कराना सुनिश्चित करें। नाव और मोटर बोट की व्यवस्था कराएं। प्रभावित किसानों की सूची उपलब्ध कराएं ताकि उन्हें शासन से सहायता दिलाई जा सके।
बिजली विभाग अधिशासी अभियंता को प्रभावित गांवों में लाइनें दुरुस्त कराने और राहत व बचाव के अन्य कदम उठाने के निर्देश दिए। जल संस्थान और जल निगम को पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। निकायों के अधिशासी अधिकारियों से कहा कि बारिश के समय कूड़े के ढेर शीघ्र उठवाए जाएं। बाढ़ चौकियों पर सफाई और रोशनी की व्यवस्था रहे। सीएमओ से कहा कि जितने भी डाक्टर हैं उनकी टीम बनाकर बाढ़ इलाकों में भेजें। पशु चिकित्सा विभाग चारे-भूसे और टीकाकरण का इंतजाम करे। जिला पूर्ति अधिकारी को लाई, चना, गुड़, माचिस आदि की व्यवस्था के निर्देश दिए।
ांदा-फतेहपुर स्टेट हाईवे पर चिल्ला पुल में उफनाई यमुना नदी का जल स्तर।- फोटो : BANDA
चिल्ला क्षेत्र के खजुरी गांव में बाढ़ का पानी।- फोटो : BANDA