बेंच में बच्चों के साथ बोतल चढ़वाती महिला।
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बांदा। बुखार और डायरिया के मरीजों में प्रतिदिन 600 आईवी फ्लूड (बोतल इंजेक्शन) की खपत हो रही है। औसतन जिला अस्पताल में प्रतिदिन 150 मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। बुधवार को भी बुखार और डायरिया के मरीजों से जिला अस्पताल का ट्रामा सेंटर फुल रहा। स्ट्रेचर और बेंच में मरीजों का इलाज किया गया। भर्ती मरीजों ने बताया कि दो बोतल चढ़ने के बाद तीसरी और चाैथी बोतल चढ़ाने के लिए डॉक्टर की सलाह लेनी पड़ती है। बेड भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बच्चों के साथ आने वाली महिलाओं को इस समस्या से दो चार होना पड़ रहा है।
बुधवार को भी जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर का नजारा हाउस फुल का रहा। यहां डायरिया से ग्रसित नौ माह की अर्पणा का इलाज कराने के लिए चमरौडी मोहल्ला से आए पिता शंकर ने बताया कि बेटी को डायरिया हुआ है। ट्रामा सेंटर में बेड नहीं मिला। इससे उन्हें अपनी बेटी को बेंच में लिटाना पड़ा। इसी तरह से जारी गांव से आए मुकेश ने बताया कि उनकी आठ माह की बेटी आकांक्षा को भी इलाज कराने के लिए बेड नसीब नहीं हो रहा। जिला अस्पताल में बच्चों को चढ़ने वाला आईवी फ्लूड आईसीपी व व्यस्कों को चढ़ने वाली फ्लूड आरएल, डीएनएस, डी-10, डी-5 का पर्याप्त मात्रा में होने का दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन दो बोतल चढ़ने के बाद तीसरी और चौथी चढ़ाने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना शामिल किया गया है। जिला अस्पताल में बुधवार को चमरौडी निवासी तेजस्वनी (12), काशीराम कालोनी निवासी सलमा (25), सर्वोदय नगर के नवल किशोर (75), महावरा गांव की उज्मा खान (25), करहिया गांव की मुन्नी देवी (65), पड़री गांव की संजना (11), गुरेह गांव के हरीराम (30), छह माह के शिवांश, मर्दननाका की कलावती (48), महुवा गांव के अंकित शुक्ला (24) समेत 20 लोगों को भर्ती किया गया है।
वर्जन
बुखार और डायरिया के एक मरीज पर कम से कम चार बोतल की खपत हो रही है। दो बोतल चढ़ने के बाद उसकी कंडीशन को देखते हुए तीसरी और चौथी बोतल चढ़वाई जाती है। हालांकि ज्यादातर मरीजों को चार बोतल ही खपत हो रही है। जिला अस्पताल के स्टोर में आईवी फ्लूड का पर्याप्त मात्रा में स्टॉक है। -डॉ. विनीत सचान, वरिष्ठ ईएमओ, ट्राॅमा सेंटर, बांदा।