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पल्लेदारों की हड़ताल से समितियों में नहीं पहुंची खाद

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बांदा। लोडिंग-अनलोडिंग की मजदूरी कई माह से न मिलने पर पीसीएफ पल्लेदारों व मजदूरों ने काम बंद कर दिया है। जिस कारण गोदाम से समितियों को खाद भेजे जाने का काम ठप हो गया है। किसानों के लिए खाद का संकट और गहराने के आसार हैं। जबकि बारिश के बाद फसलों को बचाने के लिए किसानों को यूरिया की सख्त दरकार है।
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गोदामों से समितियों तक खाद की ढुलाई ठेके पर होती है। इसके लिए एफसीआई व पीसीएफ अलग-अलग टेंडर करते हैं। मजदूरों ने बताया कि ठेकेदारों ने उन्हें अगस्त माह से भुगतान नहीं किया। ठेकेदारों का कहना है कि पीसीएफ ने उनका भुगतान नहीं किया है। मजदूरों का कहना है कि अब उनके सामने खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। मजबूरन हड़ताल पर जाने का निर्णय लेना पड़ा। मजदूरी न मिलने तक हड़ताल जारी रहेगी।
उधर, ठेकेदार इरशाद व जयराम का कहना है कि उनका करीब दो करोड़ का भुगतान लंबित है। ऐसे में वह मजदूरों को कहां से मजदूरी दें? बताया कि उधारी अधिक हो जाने से पेट्रोल पंपों पर ट्रकों को उधार ईंधन भी नहीं मिल रहा है। उधर, गोदाम प्रभारी हेमंत का कहना है कि मान-मनौव्वल के बाद ठेकेदारों ने ट्रक भेजना शुरू किया है। तीन दर्जन पल्लेदारों में पांच ही काम करने के लिए राजी हुए हैं। ऐेसे में मांग के अनुरूप अतर्रा, नरैनी व बबेरू की समितियों को खाद नहीं भेज पा रहे हैं।
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इस बाबत पीसीएफ क्षेत्रीय प्रबंधक पुष्पेंद्र कुशवाहा का कहना है कि ठेकेदारों के भुगतान के लिए शासन को लिखा गया है। एक दो दिन में भुगतान कर दिया जाएगा। क्षेत्रीय प्रबंधक का दावा है कि ठेकेदार खाद लोडिंग व अनलोडिंग के लिए राजी हो गए हैं। त्योहार में मजदूर घर चले गए थे। इससे यह काम बाधित हुआ। अब रविवार से समितियों को खाद भेजना शुरू हो गया है।
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