बांदा। सूखा व अकाल से जूझ रहे बुंदेलखंड में भूखों के प्रति शहरी युवाओं की हमदर्दी है। वह बगैर किसी शोहरत या प्रचार के भूखों की भूख मिटाने का बेमिसाल अभियान छेड़ चला रहे हैं। इनमें तमाम घरों की गृहणियां भी शामिल हैं। पिछले एक सप्ताह से युवाओं की यह टीम घरों से रोटियां जुटा कर फुटपाथों और मंदिरों आदि पर भीख मांगने को बैठे भूखों को परोस रहे हैं।
हमदर्दी और भूखों के प्रति सहानुभूति का यह अभियान शहर के आवास विकास (ए ब्लाक) के युवाओं ने छेड़ा है। खास बात यह है कि इसमें शामिल कोई भी युवक अपनी शोहरत हरगिज नहीं चाहता। इसके लिए इतनी परहेज की है कि अपने नाम भी बताना उन्हें गवारा नहीं है। युवकों की यह टीम रोजाना शाम चार से छह बजे बाल्टी व डलिया लेकर घर-घर दस्तक देती है और वहां से मिलने वाली रोटी-सब्जी (भोजन) इकट्ठा करती है।
इसके बाद शाम छह बजे से संकट मोचन मंदिर और रेलवे स्टेशन आदि में फुटपाथों पर जिंदगी बसर कर रहे भूखों और बेसहारों को भोजन परोसने का सिलसिला शुरू हो जाता है। यह अभियान एक हफ्ते पूर्व शुरू हुआ है। पहले दिन 30 गरीबों का भोजन इकट्ठा कर बांटा गया। अब यह आंकड़ा बढ़कर 100 पहुंच गया है। घरों की महिलाएं भी खुशी-खुशी खाना देकर युवाओं का हौसला बढ़ा रही हैं।