फसलोें में 33 फीसदी नुकसान का सर्वे पूरे जनपद में पूरा हो गया है। बड़े काश्तकारों को एक हेक्टेअर के स्थान पर अब दो हेक्टेअर तक का मुआवजा मिलेगा। इस बारे में भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है।
यह बात डीएम सुरेश कुमार ने बृहस्पतिवार को शाम कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि पूर्व में 50 फीसदी तक नुकसान के हिसाब से बांदा जनपद के किसानों को राहत देने के लिए 149 करोड़ रुपये मांगे गए थे, लेकिन 33 फीसदी तक नुकसान के कृषि निवेश अनुदान के लिए 3 अरब 36 करोड़ 19 लाख 89 हजार की डिमांड भेजी गई है।
उन्होंने बताया कि अब तक शासन से 96 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें से 1,16,822 किसानों को 54 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। डीएम ने जनपद में 43 किसानों की मौत की सूचना को स्वीकारा, लेकिन दैवी आपदा से एक भी मौत नहीं स्वीकारी।
उन्होंने कहा कि मृतक किसानों की आर्थिक स्थिति, उनकी खेती का नुकसान और नाबालिग बच्चों की स्थिति की सूचनाएं मांगीं जा रहीं हैं। संभव हुआ तो उन्हें विवेकाधीन कोष से आर्थिक मदद मिलेगी। दैवी आपदा से सिर्फ एक महिला बबेरू क्षेत्र के गांव पिंडारन की कमलेश की जान गई है, जिसकी बिजली गिरने से मौत हुई थी। उसके आश्रितों को 7 लाख मुआवजा दिया जाना है। डीएम ने वर्ष 2007-08 से अब तक साल दर साल किसानों को बांटी गई सरकारी मदद के भी आंकड़े परोसे।
राहत राशि कर्ज में नहीं कटेगी
किसानों को दी जा रही राहत राशि उनके कर्ज में नहीं काटी जाएगी। बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों से अगले एक साल तक कोई वसूली नहीं की जाएगी। यह जानकारी डीएम द्वारा आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इलाहाबाद बैंक के परामर्शदाता मुमताज खां ने दी। उन्होंने यह भी बताया कि परेशान व तंगहाल किसान 10,000 रुपये बैंक से कर्ज ले सकते हैं। यह राशि राशन और दवा आदि पर ही खर्च करनी होगी। पत्रकार वार्ता में उप कृषि निदेशक उमेशचंद्र कटियार भी उपस्थित थे।