बांदा। समितियों में आई खाद सोमवार को टोकन से दी गई, लेकिन 15 दिनों से खाद के लिए परेशान तमाम किसानों के चेहरों पर मायूसी ही दिखी। किसानों का आरोप है कि प्रभारी चोरी-छिपे किसानों को 100 से 200 रुपये में टोकन बेच रहे हैं, जबकि रात दो बजे से मंडी में टोकन के लिए लाइन लगाने वाले किसानों को खाद नहीं मिली।
सोमवार को मंडी समिति के पीसीएफ सहित तीनों केंद्रों पर रैक से सीधे पांच-पांच टन खाद भेजी गई। पखवारे भर से खाद के लिए भटक रहे किसानों के चेहरों पर कुछ उम्मीदें नजर आईं। पीसीएफ, डीसीडीएफ व किसान सेवा केंद्र पर करीब 200-200 टोकन बांटे गए थे। मौके पर न तो कोई पुलिसकर्मी नजर आया और नहीं राजस्व विभाग का कोई कर्मचारी दिखा। किसान एक-एक बोरी डीएपी खाद के लिए केंद्रों पर नंबर का इंतजार करते रहे। एक टोकन पर दो बोरी डीएपी खाद दी गई। एक बोतल तरल डीएपी भी 600 रुपये की थमाई गई, जिसका उपयोग किसान नहीं कर पा रहे हैं। फिलहाल ज्यादा समितियों में खाद पहुंचने पर किसानों को बड़ी राहत मिली। गेहूं की बोआई के लिए पलेवा कर चुके किसानों ने खाद मिलने पर राहत महसूस की।
बोले किसान-
करहिया के किसान रामकृपाल ने बताया कि सप्ताह भर से खाद के लिए आते हैं। टोकन के लिए रात भर जागते हैं। फिर भी खाद नहीं मिल पा रही है, जबकि बिना लाइन वाले आराम से खाद लेकर चले जाते हैं।
ग्राम त्रिवेणी के विशुंथा ने बताया कि केंद्र में पूरे टोकन न हीं बांटे जाते। प्रभारी व उनके आदमी 10 से 20 टोकन अपने पास रख लेते हैं। 100 रुपये ज्यादा देने पर उन्हें बेच देते हैं। हम लोग इंतजार ही करते रहते हैं।
किसानों व कर्मचारियों के बीच हुई नोकझोंक
अतर्रा। बिसंडा में स्थित सहकारी समिति में सोमवार को डीएपी खाद लेने के लिए किसानों की भारी भीड़ उमड़ी। करीब दो घंटे तक खाद न मिलने पर किसान भड़क उठे। समिति के कर्मचारियों और किसानों के बीच तीखी बहस हुई और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। मुख्य चौराहे के पास स्थित समिति के बाहर लगी लंबी कतारों के कारण यातायात भी बाधित हुआ। किसान अरुण मिश्रा, राजाराम, विनोद द्विवेदी, पिंकू तिवारी, अविनाश द्विवेदी, श्याम सुंदर, बालेंद्र तिवारी, बब्बू समेत अन्य किसानों ने बताया कि गेहूं की बोआई का समय बीत रहा है, खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही। पिछले 15 दिनों से वे सहकारी समिति के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उन्होंने समिति के कर्मचारियों पर खाद की कालाबाजारी करने का भी आरोप लगाया। सहकारी समिति के सचिव जितेंद्र भदौरिया ने कहा कि उन्हें जितनी खाद उपलब्ध हो रही है, वह टोकन के जरिए बांटी जा रही है।
किसानों ने लगाया कालाबाजारी का आरोप
ओरन। खाद की भारी किल्लत है। समय पर खाद न मिलने से फसलें हो रही बर्बाद। कस्बा स्थित समिति में किसान 24 घंटे लाइन लगकर सर्दी में खड़े रहते हैं, फिर भी उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। किसानों का कहना है कि सोसायटी सचिव मनमाने तरीके से खाद का वितरण करते हैं। खाद न मिलने से गुस्साए ग्रामीणों ने जाम लगाने की कोशिश की। प्रभु दयाल, मनोज, सुखदेव, मातादीन,सुखरनिया आदि किसानों ने नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया व चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही खाद का वितरण नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन करेंगे।
वर्जन-
-जनपद में खाद का पर्याप्त स्टाक है। किसान परेशान न हों, उन्हें खाद मिलेगी। एक टोकन पर दो-दो बोरी खाद दी जा रही है। टोकन बेचने की जांच कराएंगे। -प्रदीप सिंह, उप आयुक्त व उप निबंधक, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा