धान खरीद केंद्रों में किसान ठगे जा रहे हैं। नमी के नाम पर अधिक तौल की जा रही है। पल्लेदारों की मजदूरी भी किसानों को ही लग रही है। इसके अलावा धान सफाई को पंखा चलाने के लिए ट्रैक्टर का डीजल अलग फूंकना पड़ रहा है।
कुल मिलाकर किसानों को लगभग 200 रुपये प्रति क्विंटल की चपत लग रही है। मंडी समिति में विपणन शाखा और एग्रो के धान खरीद केंद्र हैं। दो माह सन्नाटे के बाद अब इन केंद्रों में किसानों की आमदरफ्त बढ़ गई है। खरीद का समर्थन मूल्य 1360 रुपये निर्धारित है, लेकिन खर्च कटौती के बाद किसानों को लगभग 1150 रुपये प्रति क्विंटल पड़ रहा है।
इसमें ट्रैक्टर भाड़ा भी शामिल है। शनिवार को धान बेचने आए किसान चंद्रपाल व संजय सिंह ने बताया कि 30 रुपये प्रति क्विंटल मजदूरों की मजदूरी किसानों से वसूली जाती है। धान सफाई के लिए पंखा चलाने को किसान का ही ट्रैक्टर इस्तेमाल होता है। एक घंटे में लगभग तीन लीटर डीजल खप जाता है।
इसके अलावा नमी के नाम पर तौल भी ज्यादा की जा रही है। इस बाबत विपणन शाखा में मौजूद लिपिक अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि धान में निर्धारित नमी 17 प्रतिशत से ज्यादा निकल रही है। सूखने पर वजन कम हो जाएगा। मजबूरी में कुछ बढ़ाकर तौला जा रहा है। अब तक 2315 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है।
दूसरी तरफ एग्रो केंद्र प्रभारी नवल किशोर यादव ने बताया कि लक्ष्य 5000 क्विंटल है। अब तक 346.80 क्विंटल खरीद हो गई। उन्होंने भी धान में नमी ज्यादा होने की बात स्वीकारी। उधर, जगदीश राजपूत, जग्गू, लल्ला, रामदेव, शिवकुमार राजपूत आदि मजदूरों ने बताया कि सरकार से उन्हें कोई मजदूरी नहीं मिलती। किसानों के सहारे ही परिवार चल रहा है।