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सूखे के बाद अच्छी पैदावार की उम्मीद

Sun, 16 Oct 2016 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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औसत से ज्यादा बारिश और अनुकूल मौसम ने इस साल रबी की फसल में बेहतर पैदावार की उम्मीद बढ़ा दी है।  कृषि विभाग ने इस साल रबी फसल की बुवाई का लक्ष्य 25 हजार हेक्टेयर बढ़ा दिया है। पिछले साल सूखे से लक्ष्य घटकर 54,272 हेक्टेयर करना पड़ा था, वहीं इस साल 79,241 हेक्टेयर
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में रबी की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि वैज्ञानिकों ने भी अबकी नमी पर्याप्त होने से  दलहनी और तिलहनी फसलों की अच्छी उपज होने की उम्मीद जाहिर की है। कृषि विभाग के मुताबिक जनपद में पिछले पांच सालों दलहनी और तिलहनी की पैदावार करीब 60 फीसदी घटी है। इसकी

वजह मौसम का साथ न देना है लेकिन इस साल बारिश भी भी अच्छी हुई है और नमी भी खेतों में साथ दे रही है। इससे दलहनी व तिलहनी खासकर अलसी, चना, मसूर, सरसो व मटर की बेहतर पैदावार हो सकती है। इसी को देखते हुए शासन ने जिले में रबी फसल का लक्ष्य पिछले साल के मुकाबले
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54,272 से बढ़ाकर 79,241 हेक्टेयर कर दिया है। गेहूं की फसल 22,873 से बढ़कर 23,478 हेक्टेयर में होगी। वहीं मसूर का रकबा करीब 17 हजार हेक्टेयर बढ़ाया गया है। यह 20,527 के मुकाबले 37718 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोने की तैयारी है। सरसों 890 के मुकाबले 1109, अलसी 1012 के मुकाबले 2119 हेक्टेयर में पैदा होगी। मटर 3347 और चना 6523 हेक्टेयर में बोया जाएगा।

उन्नति प्रजातियों का करें चयन
‘चना, मसूर और सरसों की ज्यादा से ज्यादा बुवाई किसानों के लिए इस साल लाभदायक रहेगा। खेतों की पहले दो बार गहरी जुताई करें। जरूरत हो तो पलेवा करें और ताव आने पर पहटा करें। फिर निर्धारित मानक पर बुवाई करें। कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेते रहें। चना में जेसी-14, सम्राट, उदय या

फिर जाकी-9218 जैसी प्रजातियां बेहतर पैदावार देंगी। ये प्रजाति बुंदेलखंड में मिट्टी व वातावरण के अनुकूल भी हैं। औसत से ज्यादा बारिश और अनुकूल मौसम ने इस साल रबी की फसल में बेहतर पैदावार की उम्मीद बढ़ा दी है।  कृषि विभाग ने इस साल रबी फसल की बुवाई का लक्ष्य 25 हजार

हेक्टेयर बढ़ा दिया है। पिछले साल सूखे से लक्ष्य घटकर 54,272 हेक्टेयर करना पड़ा था, वहीं इस साल 79,241 हेक्टेयर में रबी की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि वैज्ञानिकों ने भी अबकी नमी पर्याप्त होने से  दलहनी और तिलहनी फसलों की अच्छी उपज होने की उम्मीद जाहिर की है।

कृषि विभाग के मुताबिक जनपद में पिछले पांच सालों दलहनी और तिलहनी की पैदावार करीब 60 फीसदी घटी है। इसकी वजह मौसम का साथ न देना है लेकिन इस साल बारिश भी भी अच्छी हुई है और नमी भी खेतों में साथ दे रही है। इससे दलहनी व तिलहनी खासकर अलसी, चना, मसूर, सरसो व

मटर की बेहतर पैदावार हो सकती है। इसी को देखते हुए शासन ने जिले में रबी फसल का लक्ष्य पिछले साल के मुकाबले 54,272 से बढ़ाकर 79,241 हेक्टेयर कर दिया है। गेहूं की फसल 22,873 से बढ़कर 23,478 हेक्टेयर में होगी। वहीं मसूर का रकबा करीब 17 हजार हेक्टेयर बढ़ाया गया है। यह

20,527 के मुकाबले 37718 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोने की तैयारी है। सरसों 890 के मुकाबले 1109, अलसी 1012 के मुकाबले 2119 हेक्टेयर में पैदा होगी। मटर 3347 और चना 6523 हेक्टेयर में बोया जाएगा।


‘किसान समय से बुवाई करें और समय-समय पर प्रबंधन करें तो रिकार्ड पैदावार हो सकती है। बारिश औसत से ज्यादा हुई है। इसलिए खेतों में नमी भी बरकरार रहेगी। उन्नति प्रजाति के बीजों का चयन कर उसे उपचारित करें और फिर बुवाई करें।’
बाल गोविंद यादव, जिला कृषि अधिकारी     

उन्नति प्रजातियों का करें चयन
‘चना, मसूर और सरसों की ज्यादा से ज्यादा बुवाई किसानों के लिए इस साल लाभदायक रहेगा। खेतों की पहले दो बार गहरी जुताई करें। जरूरत हो तो पलेवा करें और ताव आने पर पहटा करें। फिर निर्धारित मानक पर बुवाई करें। कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेते रहें। चना में जेसी-14, सम्राट, उदय या फिर जाकी-9218 जैसी प्रजातियां बेहतर पैदावार देंगी। ये प्रजाति बुंदेलखंड में मिट्टी व वातावरण के अनुकूल भी हैं।
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