सिंचाई विभाग ने बांधाें का बचा-खुचा पानी नहरों के हवाले कर दिया है। साथ ही दावा किया कि लगभग 300 तालाब और पोखर भर दिए गए हैं। हकीकत यह है कि पांच दिन पूर्व चालू की गई केन नहर का पानी बांदा में नाम मात्र का पहुंचा है। नहर में भरे कचरे ने पानी की रफ्तार थाम दी। किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। अब नहर में पानी तब आएगा जब बारिश होगी और बांध भरेंगे।
गंगऊ और बरियापुर बांधों में पानी खत्म हो गया है। सिंचाई विभाग ने कुछ पानी गर्मियों के लिए बचा रखा था। इसे भी 20 मई से नहरों में छोड़ दिया गया।। विभाग का दावा है कि 360 क्यूसेक पानी नहर में छोड़ा गया और रविवार (24 मई) को नहर बंद करने का शेड्यूल था।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ओपी मौर्या ने बताया कि अतर्रा ब्रांच नहर 15 से 19 मई तक चलाई गई। जबकि बांदा ब्रांच 20 से 24 मई तक चली। इस पानी से 276 तालाब और 60 पोखर भरे गए।
इसके अलावा सिंचाई विभाग तृतीय खंड ने 31 तालाब भरने का दावा किया है। औगासी पंप कैनाल से 40 तालाब भरना बताया जा रहा है। सिंचाई विभाग के तार बाबू फारुक अहमद ने बताया कि अब नहरें खरीफ फसल के लिए 7 जुलाई से चलेंगी। वो भी तब जब बारिश के पानी से बांध भर जाएंगे।