बांदा। विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन करने में बसपा आगे निकल गई है। बांदा-चित्रकूट संसदीय क्षेत्र में आने वाली सभी छह सीटों पर हाथी के महावत (प्रत्याशी) तय कर दिए हैं। भाजपा, सपा और कांग्रेस में बांदा की चार सीटों के लिए 127 से ज्यादा आवेदन हुए हैं। सबसे ज्यादा दावेदारी सपा में है। साइकिल चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने के लिए 60 से अधिक आवेदन किए गए हैं। सबसे कम 25 दावेदार भाजपा से हैं।
बांदा-चित्रकूट संसदीय क्षेत्र में शामिल सभी छह सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए। बांदा, बबेरू और कर्वी में प्रत्याशी की घोषणा शुक्रवार को बसपा महासचिव और राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्र ने अतर्रा की जनसभा में मंच से की। बांदा की नरैनी सुरक्षित और चित्रकूट की मऊ-मानिकपुर सीट में पहले ही प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। बांदा की तिंदवारी सीट हमीरपुर-महोबा संसदीय सीट में आती है। इस सीट के प्रत्याशी की घोषणा हमीरपुर-महोबा संसदीय की विधानसभा सीट के प्रत्याशियों के साथ घोषित होने का अनुमान है। अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों के अध्यक्ष या बड़े नेता टिकट को लेकर खुलकर बात नहीं कह रहे हैं। कुरेदने पर रटारटाया जवाब मिल रहा है कि पार्टी हाईकमान तय करेगी।
बसपा प्रत्याशियों का राजनीतिक इतिहास
बसपा के घोषित प्रत्याशियों में नरैनी सुरक्षित सीट से उम्मीदवार गयाचरन दिनकर पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वह बसपा सरकार में काबीना मंत्री रहे। सपा की सरकार बनने पर पार्टी ने उन्हें नेता विरोधी दल बनाया था। वह बुंदेलखंड में अनुसूचित जाति में खासकर पकड़ रखते हैं। बांदा सदर से प्रत्याशी धीरज राजपूत वर्ष 2013-14 में सपा से बसपा में आए थे। सपा के जिला पंचायत सदस्य रहते जिला पंचायत अध्यक्ष बल्देव वर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बसपा के पक्ष में वोट दिया था। पत्नी तिंदवारा वार्ड से जिला पंचायत की सदस्य हैं। बबेरू से प्रत्याशी रामसेवक शुक्ला वर्ष 2006 से बसपा में हैं। वर्ष 2012 के चुनाव में बसपा ने उन्हें कर्वी (चित्रकूट) सीट से चुनाव लड़ाया था। बसपा सरकार में वह प्राविधिक शिक्षा बोर्ड के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) रहे। बसपा के ब्राह्मण समाज भाईचारा में मंडल कोआर्डिनेटर भी रहे हैं।
बांदा की सभी तीन प्रमुख दलों में टिकट के आवेदन
सीट सपा भाजपा कांग्रेस
बांदा 30 08 11
बबेरू 08 07 13
नरैनी 14 05 12
तिंदवारी 08 05 06
योग 60 25 42
नोट- आवेदकों की संख्या दलों से मिली और अनुमानित है।
भाजपा में सीटिंग विधायकों का रुतबा
टिकट को लेकर भाजपा में ज्यादा हायतोबा नहीं है। इसके पीछे माना जा रहा है कि सीटिंग (मौजूदा) विधायकों का पलड़ा भारी है। इनके मुकाबले टिकट मांगने की हिम्मत छोटे नेता या कार्यकर्ता नहीं जुटा पा रहे। अलबत्ता अपनी कुछ पकड़ और पार्टी में असर रखने वाले नेताओं ने आवेदन किया है। भाजपा के चारों विधायक भी चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी में हैं। उन्हें भरोसा है कि टिकट रिपीट होगा।