ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कालिंजर दुर्ग के लिए केंद्र की भाजपा सरकार ने आठ करोड़ से भी ज्यादा रुपये की योजनाएं मंजूर की हैं। हैरिटेज सर्किट के अंतर्गत स्वदेश दर्शन योजना के तहत दुर्ग में पर्यटन विकास के लिए 16 परियोजनाओं पर यह बजट खर्च होगा।
केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा ने सांसद भैरो प्रसाद मिश्र को भेजे पत्र में यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में हैरिटेज सर्किट के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं में कालिंजर दुर्ग के लिए आठ करोड़ सात लाख 53 हजार 90 रुपये दिए गए हैं। इसमें ढाई करोड़ से कालिंजर दुर्ग का दो किलोमीटर लंबा और सात मीटर चौड़ा संपर्क मार्ग बनेगा।
दो करोड़ 10 लाख में व्याख्यान केंद्र, एक करोड़ 50 लाख 90 हजार में प्रदर्शनी केंद्र, आठ लाख 32 हजार में टिकट केंद्र, 19 लाख 20 हजार में रेन शेल्टर, 26 लाख में पार्किंग, 30 लाख में दुर्ग की दीवारों की रोशनी, 48 लाख में टायलेट ब्लाक, पांच लाख में बारिश के पानी का संग्रहण, दो लाख 85 हजार में मंदिर क्षेत्र में सोलर लाइट, 8 लाख 32 में प्रशासनिक कार्यालय, 11 लाख 60 हजार में साइनेज, 28 लाख 50 हजार में बेंच, दो लाख 24 हजार में कूड़ेदान और पांच लाख रुपये पेयजल पर खर्च किए जाएंगे। मंत्री ने सांसद को यह भी जानकारी दी है। सभी काम केंद्रीय कार्यदाई संस्था डब्ल्यूएपीसीओएस को दिया गया है।
बांबेश्वर मंदिर के लिए सवा 13 लाख मंजूर
बांदा। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने बांदा शहर के प्राचीन बांबेश्वर पहाड़ स्थित बामदेव मंदिर के पर्यटन विकास के लिए भी 13 लाख 25 हजार रुपये स्वीकृृत किए हैं। केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा ने इसकी भी जानकारी सांसद भैरो प्रसाद मिश्र को पत्र से दी है। बताया कि उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक परिपथ के अंतर्गत पर्यटन विकास के लिए स्वदेश दर्शन योजना के अतंर्गत यह बजट स्वीकृत किया गया है। यह भी बताया कि यह काम केंद्रीय कार्यदाई संस्था एनपीसीसी द्वारा कराया जाएगा।
अक्तूबर में किया था केंद्रीय समिति ने सर्वे
बांदा। केंद्र सरकार के पर्यटन विभाग के मंत्रालय द्वारा कालिंजर और बांबेश्वर के लिए स्वीकृत की गई लगभग सवा आठ करोड़ धनराशि पर भाजपा नेताओं ने खुशी जताई है। कहा है कि सांसद के प्रयासों से अक्तूबर में पर्यटन मंत्रालय की टीम ने यहां आकर सर्वेक्षण किया था। ऐतिहासिक स्थल भी देखे थे। टीम के साथ भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री धर्मेंद्र त्रिपाठी सहित अशोक त्रिपाठी जीतू, सचिन अग्निहोत्री, नागेश खरे, दुलीचंद्र राजपूत भी थे। टीम ने खत्रीपहाड़, गुढ़ा के हनुमान और जमरेही बाबा का भी निरीक्षण किया था। उसे के तहत पहले चरण में कालिंजर और बांबेश्वर के लिए बजट मिला है।
प्रागी मंदिर का भी हो सुंदरीकरण
बांदा। समाजसेवी और आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ला ने पुरातत्व निदेशालय, लखनऊ को पत्र भेजकर बांदा शहर में स्थित लगभग 500 वर्ष पुराने प्राचीन प्रागी मंदिर और प्रागी तालाब के सुंदरीकरण का अनुरोध किया है। कहा कि प्रागी मंदिर में संगमरमर का विशाल शिवलिंग है। कई अति प्राचीन और दुर्लभ मूर्तियां हैं। मंदिर की दीवारों और गुंबद में खजुराहों की तर्ज पर कलाकृतियां हैं। लेकिन मेंटेनेंस न होने से ये खंडहर हो रहे हैं। यही हाल प्रागी तालाब का भी है। इन दोनों धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का सुंदरीकरण कराया जाए।