फोटो- 13 छह माह की मासूम के साथ दुष्कर्म करने वाले दोषी को फांसी की सजा सुनाए जाने के दौरान कोर
बांदा। मंडल कारागार में वर्तमान में तीन ऐसे कैदी निरुद्ध हैं। तीनों को न्यायालय द्वारा छह पाक्सो एक्ट के तहत मृत्युदंड दिया जा चुका है। इन मामलों में सबसे अहम पहलू यह है कि बांदा में फांसी घर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में तीनों दोषी मेरठ तक का अंतिम सफर तय करेंगे। दो मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत रिकॉर्ड समय में सुनवाई पूरी कर मृत्युदंड सुनाया गया है। यह बदलाव न्यायिक प्रक्रिया में तेजी और नए कानून की सख्ती को दर्शाता है।
मृत्युदंड पाए कैदियों में से मरका थाना क्षेत्र के रामबहादुर प्रजापति को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत महज 28 दिनों के भीतर दोष सिद्ध होने पर पाक्सो एक्ट के तहत सजा सुनाई गई थी। वहीं बीएनएस लागू होने के बाद दो मामलों में अदालत ने चिल्ला थाना क्षेत्र के दुष्कर्म के दोषी सुनील निषाद को 58 दिनों में दोष सिद्ध होते ही 8 सितंबर 2025 को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
इसके बाद 6 जनवरी 2026, मंगलवार के दिन 11 बजकर 56 मिनट पर कालिंजर थाना क्षेत्र के अमित रैकवार को 56 दिनों के अंदर ट्रायल पूरा कर अंतिम फैसला सुनाते हुए दुष्कर्म मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाई है। जानकार इसे बीएनएस की फास्ट ट्रैक न्याय व्यवस्था का स्पष्ट उदाहरण मान रहे हैं।
मृत्युदंड के मामलों में तेजी आई है लेकिन मंडल कारागार की बुनियादी व्यवस्था इस सख्ती के साथ कदम नहीं मिला पा रही हैं। यहां फांसी घर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इन तीनों मृत्यु दंडित कैदियों को भविष्य में फांसी देने के लिए मेरठ जिला कारागार भेजा जाएगा। प्रदेश में वर्तमान में मेरठ जेल ही वह प्रमुख कारागार है, जहां फांसी की प्रक्रिया संपन्न कराए जाने का प्रावधान है।
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सुरक्षा और प्रशासन के लिए चुनौती
बांदा। मृत्यु दंडित कैदियों को दूसरे जिले की जेल में शिफ्ट करना प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है। लंबी दूरी, हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट और गोपनीयता बनाए रखना पुलिस व जेल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। यही कारण है कि हर मृत्युदंड के मामले में विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जाते हैं। नए कानून के तहत तेजी से आए फैसलों के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रदेश के अन्य मंडल कारागारों में भी फांसी की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, ताकि प्रशासनिक निर्भरता कम हो और प्रक्रिया और पारदर्शी बन सके।