बांदा। अप्रैल में जिले में 44 डिग्री सेल्सियस तापमान फसलों के लिए असहनीय हो रहा है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो यह तापमान सब्जी की फसलों के साथ उर्द, मूंग की फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। उधर, देर से बोया गया गेहूं सूखने लगा है। पैदावार पर इसका असर पड़ना तय है।
जनपद के नरैनी, अतर्रा क्षेत्र में सर्वाधिक धान की खेती होती है। नवंबर व दिसंबर में धान की कटाई के बाद यहां पर गेहूं की फसल बोई जाती है। जो सामान्य गेहूं की फसल से करीब डेढ़ माह पिछड़ जाती है। इन क्षेत्रों में अभी भी सैकड़ों एकड़ में गेहूं की फसल खड़ी है। इसे तैयार होने में करीब 15 दिन का समय और लगेगा। अचानक दिन में अधिकतम तापमान 44 डिग्री के करीब पहुंच जाने से गेहूं की फसल असमय ही सूख रही है।
बिलगांव के किसान सुरेश का कहना है कि असमय गेहूं के सूखने से दाना पतला हो गया है। उपज पर प्रति हेक्टेयर करीब एक से दो क्विंटल की गिरावट आ रही है। ऐसे में किसानों को खासा नुकसान हो रहा है।
अतराहट के किसान रामभवन का कहना है तापमान बढ़ने से उर्द, मूंग के पौध सूख रहे हैं। पानी लगाने के बाद भी फसल पर कोई प्रभाव नहीं पढ़ रहा है। 36 घंटे में ही खेतों की नमी उड़ जाती है और फसल पानी मांगने लगती है।
20 फीसदी गेहूं को तापमान का खतरा
जिला कृषि अधिकारी मनोज गौतम का कहना है कि यूं तो जनपद में 80 फीसदी गेहूं की फसल कट गई है, लेकिन जो 20 फीसदी बची है उस पर बढ़े तापमान का असर पड़ना स्वाभाविक है। किसानों को फसल बचाने के लिए सुबह-शाम खेतों में पानी लगाए। दोपहर में पानी लगाने से वह गर्म हो जाएगा। जिससे फसल के खराब होने का खतरा है। उधर, जायद के किसान भी पलेवा देने के बाद फसल की बोआई करें। जिन्होंने उर्द, मूंग बो दिया है वह शाम को फसल में पानी लगाएं।
शाम के समय लगाएं पानी
कृषि एवं मौसम वैज्ञानिक दिनेश साहा का कहना है कि गेहूं की फसल के लिए अधिकतम 30 डिग्री सेल्सियस व जायद की फसल के लिए 27 डिग्री सेल्सियम तापमान होना चाहिए। मौजूदा समय में अधिकतम तापमान 40 व 41 डिग्री के इर्द गिर्द है। ऐसे में फसलों में तापमान का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। किसानों को फसल बचाने के लिए शाम के समय पानी लगाना चाहिए। शाम के समय पानी लगाने से खेतों में अधिक समय तक नमी बनी रहती है।
तपिश ने बढ़ाया सब्जी की फसलों पर संकट
बांदा। जनपद में इस केन नदी किनारे और गांवों में नलकूप के सहारे किसान गर्मी के मौसम में अक्सर सब्जी-बारी लगाते हैं। अप्रैल में करेला, भिंडी, लौकी, खीरा, ककड़ी, कद्दू, बैंगन, कुल्फा जैसी सब्जियां बड़े पैमाने पर आती हैं। इस समय तापमान अधिक है जिसका प्रभाव भी सब्जियों पर पड़ रहा है। भूरागढ़ में सब्जी बारी लगाए सरोज ने बताया कि पिछले सप्ताह भर से तेज धूप में सब्जियां कुम्हला रही हैं। चाहे जितना पानी डालें, तुरंत सूख जाता है। इससे उपज भी प्रभावित हो रही है।
वहीं तिंदवारी के बारेलाल का कहना है कि सब्जियों के लिए तापमान अनुकूल नहीं है। ऐसे में उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ.श्याम सिंह ने बताया कि तापमान सामान्य से ज्यादा चल रहा है। ऐसे में सब्जी फसलों का ज्यादा नुकसान होने की संभावना है। किसान सब्जी फसलों को दोपहर में पॉलिथीन से ढक सकते हैं।