बांदा। लखनऊ की नवाबी तहजीब में पली बढ़ीं डॉ. शबाना बुंदेलखंड की बहू बनने के बाद जरूरतमंद बेटियों और बालिकाओं का सहारा बन गईं। मेडिकल में उच्च शिक्षा हासिल करने (एमडी) के साथ स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में 42 साल से ससुराल में भी सेवाएं दे रही हैं।
डॉ. शबाना के पति डॉ. रफीक शहर ही नहीं बुंदेलखंड के जाने माने वरिष्ठ चिकित्सक हैं। शादी के बाद शबाना ने जीवन की नई शुरुआत की। महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं की व्यस्त दिनचर्या के बीच उनपर बालिकाओं और महिलाओं को जागरूक करने का जुनून सवार हो गया। उन्होंने महिलाओं को घूंघट और घर की चौखट से बाहर आने की अलख जगानी शुरू कर दी।
इसके लिए कुछ प्रतिष्ठित और शिक्षित महिलाओं की टीम बनाई। बताती हैं कि 25 सालों में अब तक 150 से अधिक जरूरतमंद बालिकाओं का पढ़ाई में सहयोग किया। 13 साल पहले चिराग फाउंडेशन का गठन कर सबके सहयोग से बिना भेदभाव गरीब बेटियों की शादी कराई। आर्थिक सहयोग भी किया।
दो साल पहले रफीक शबाना चैरिटेबल ट्रस्ट का गठन कर पर्यावरण संतुलन के क्षेत्र में काम कर रही हैं। कविता व शायरी से लगाव रखने वाली डॉ. शबाना ने कई किताबें भी लिखीं और उनका प्रकाशन हुआ।
इन संगठनों में है भागीदारी
डॉ. शबाना रफीक पिंक हेल्थ एवं वूमेन डॉक्टर्स विंग की चेयरपर्सन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की उपाध्यक्ष, चिराग फाउंडेशन की अध्यक्ष, कवि केदार बाबू स्मृति न्यास की उपाध्यक्ष, एचएमएस स्कूल की प्रबंधक भी हैं।
ये मिले सम्मान
एक्सीलेंस अवार्ड-2015, बेस्ट पर्सनालिटीज ऑफ इंडिया सम्मान-2015, बुंदेलखंड आदर्श सम्मान-2020, फिराक गोरखपुरी सम्मान-2022, सुषमा स्वराज सम्मान 2023, सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान 2023।