बांदा। बुंदेलखंड में रेलवे लाइन का दोहरीकरण कार्य लाइन पर नहीं आ पा रहा। इसके पूरा होने की मियाद साल दर साल बढ़ाई जा रही है। पहले वर्ष 2022 फिर 2023 और अब वर्ष 2025 में इसे पूरा किया जाना बताया जा रहा है।
वर्ष 2019-20 से चल रहे इस काम में अभी काफी पेच हैं। बेतवा और धसान नदियों में बनने वाले पुलों की ड्राइंग तैयार नहीं हो पाई है। वन और भूमि की समस्याएं भी सामने आ रही हैं। रेलवे प्रशासन को उच्चाधिकारियों से दिशा-निर्देश के प्रस्ताव का इंतजार है।
बुंदेलखंड में झांसी से मानिकपुर तक शुरू से ही इकहरी रेलवे लाइन है। इसकी लंबाई करीब 310 किमी है। कई दशकों से इस रूट पर गिनी चुनी ट्रेनें ही चल रहीं थीं। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।
कई दर्जन ट्रेनें चल रही हैं। इनमें सुपर फास्ट से लेकर साधारण यात्री ट्रेनें तक शामिल हैं। यात्रियों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है। इकहरी ट्रैक से ट्रेनें लेट लतीफ हो रहीं हैं।
रेल मंत्रालय ने झांसी-बांदा-मानिकपुर रेलवे रूट को दोहरा करने के लिए तीन वर्ष पूर्व 43 अरब 29 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत स्वीकृत की थी। वर्ष 2019-20 में पहली किस्त तीन करोड़ 40 लाख रुपये की जारी की थी। अब मौजूदा वर्ष 2021-22 के लिए ढाई अरब दिए हैं।
रेलवे ने कहा था कि यह काम वर्ष 2022-23 में पूरा हो जाएगा, लेकिन रेलवे का यह वादा भरोसेमंद नहीं रहा। अब रेलवे का कहना है कि लाइन दोहरीकरण पूरा करने की समय सीमा मार्च 2025 है। रेलवे ने दलील दी कि भूमि और वन आदि समस्याएं इसमें आड़े आ रहीं हैं। इन्हें सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
अभी किसी स्टेशन में नहीं दोहरी लाइन
झांसी-बांदा-मानिकपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण के बारे में रेलवे के उप मुख्य इंजीनियर (निर्माण एक), झांसी आशुतोष चौरसिया ने जानकारी दी कि अभी किसी भी स्टेशन के बीच दोहरीकरण का काम पूरा नहीं हुआ है।
बांदा के आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ला द्वारा मांगी गई आरटीआई में उप मुख्य इंजीनियर ने कहा कि दोहरीकरण की अनुमानित लागत 43 अरब 29 करोड़ है। चालू वर्ष 2021-22 के लिए 250 करोड़ (ढाई अरब) देने का प्राविधान है। बताया कि झांसी से महोबा के बीच मिट्टी और पुलों का काम चल रहा है।
रास्ते में पड़ने वाली बेतवा और धसान नदियों के पुल की ड्राइंग बनाने का काम प्रगति पर है। कहा कि इन कार्यों में अभी दिशा-निर्देशों का प्रस्ताव विचाराधीन है। उप मुख्य इंजीनियर ने बताया है कि दोहरीकरण पूरा करने की समय सीमा 2025 है।
42 बड़े, 456 छोटे पुल बनेंगे
रेलवे लाइन के दोहरीकरण में झांसी-मानिकपुर के बीच चार महत्वपूर्ण पुल और 42 बड़े (मेजर) पुल तथा 456 छोटे (माइनर) पुल बनेंगे। अभी मिट्टी का काम चल रहा है।
कार्यदायी संस्थाएं---
मे. घनाराम इंफ्रा इंजीनियर्स प्रा. लि., नई दिल्ली। नेशनल कांस्ट्रेक्शन प्रा. लि., इलाहाबाद। त्रिवेणी विकल्प वैष्णो (जेवी), कानपुर। मेसर्स डीपीसी-एमबीपीएल (जेवी), आगरा कैंट।
महोबा, मानिकपुर से होगी शुरुआत
रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण में अभी कुलपहाड़ से महोबा और बरुआ सागर से मऊरानीपुर के बीच जमीन का समतलीकरण किया जा रहा है। इन्हीं दोनों खंडों के बीच सबसे पहले 94 किमी में पटरी डाली जाएगी।
बरुआ सागर-मानिकपुर (42 किमी) और कुलपहाड़-महोबा (52 किमी) शामिल हैं। इन्हीं दोनों खंडों में बेतवा, केन और धसान नदियां हैं। इनमें पुल बनने हैं। टेंडर प्रक्रिया के बाद डिजाइन को स्वीकृति के लिए रेलवे के प्रयागराज मुख्यालय भेजा गया है।
छह भागों में बंटा है दोहरीकरण काम
झांसी से मानिकपुर के बीच रेलवे लाइन दोहरीकरण काम को छह भागों में बांटा गया है। झांसी से महोबा-बांदा-कर्वी-मानिकपुर तक 310 किमी और बांदा-कानपुर रूट पर खैरार से भीमसेन तक 115 किमी लंबी डबल लाइन पड़ेगी।
रफ्तार के साथ नई ट्रेनें बढ़ेंगी
डबल लाइन होने के बाद इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों को जहां नई रफ्तार मिलेगी, वहीं कुछ नई ट्रेनों के संचालन की भी संभावनाएं बढ़ेंगी। अभी सिंगल रूट होने से चल रही ट्रेनों को जगह-जगह रोका जाता है। डबल होने पर ऐसा नहीं होगा।
एक दर्जन प्रमुख स्टेशन
झांसी से मानिकपुर तक के 320 किमी रूट पर लगभग एक दर्जन प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं। इनमें मानिकपुर, कर्वी, अतर्रा, बांदा, महोबा, कुलपहाड़, घुटई, हरपालपुर, रूरा, मऊरानीपुर, रानीपुर रोड, बरुआ सागर आदि शामिल हैं। इस रूट पर विद्युतीकरण का काम पूरा हो चुका है।
सिंगल ट्रैक पर अभी दौड़ रहीं ये ट्रेनें
झांसी-मानिकपुर के मौजूदा सिंगल ट्रैक पर अभी चल रही प्रमुख ट्रेनों में संपर्क क्रांति, खजुराहो-कुरुक्षेत्र एक्सप्रेस, महाकौशल एक्सप्रेस, तुलसी एक्सप्रेस, चंबल एक्सप्रेस, बुंदेलखंड एक्सप्रेस, उदयपुर-खजुराहो एक्सप्रेस सहित झांसी-इलाहाबाद, झांसी-बांदा, झांसी-मानिकपुर पैसेंजर ट्रेने चल रहीं हैं। इनके अलावा कई माल गाड़ियां प्रतिदिन गुजरतीं हैं।
बुंदेली सांसद बनाएं दबाव
बुंदेलखंड में चल रहे रेलवे लाइन दोहरीकरण पर लगातार आरटीआई सूचनाएं लेकर इस परियोजना की प्रगति आम लोगों तक पहुंचा रहे हैं। बुंदेलखंड के सांसद रेल मंत्रालय पर दबाव बनाकर दोहरीकरण का काम शीघ्र पूरा कराने का प्रयास करें। वरना ऐसे ही इसकी मियाद बढ़ती जाएगी।
-कुलदीप कुमार शुक्ल, आरटीआई एक्टिविस्ट
कोरोना में कार्य रहा प्रभावित
दोहरीकरण के काम में कोरोना महामारी ने ब्रेक लगा दिया था। पिछले करीब एक वर्ष यह काम काफी प्रभावित हुआ। अब इसे तेजी से चालू किया गया है। दोहरी लाइन पड़ने के बाद ट्रेनों की रफ्तार और बढ़ेगी।
-मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, झांसी मंडल रेलवे