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डेंगू मरीजों का नहीं होता इलाज

Thu, 22 Sep 2016 11:38 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
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जिला अस्पताल का बंद पड़ा डेंगू वार्ड। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। जिले में कहर बरपा रहे डेंगू का मामला शासन तक पहुंचने के बाद भी जिला अस्पताल में इलाज के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। कहने को तो जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड बना दिया गया, लेकिन मरीजों का इलाज नहीं किया जा रहा है।
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ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की व्यवस्था होने पर भी किसी मरीज के लिए इसकी डिमांड नहीं की गई। किसी भी मरीज को डेंगू की आशंका होने पर कानपुर रेफर कर दिया जाता है। अब तक जिले में डेंगू से आधा दर्जन से अधिक मौतें हो चुकी हैं। इनमें से ज्यादातर की जान कानपुर में इलाज के दौरान गई है। इसके अलावा सैकड़ों लोग दूसरे जिलों में इलाज करा रहे हैं।
 
करीब एक माह से जिले में डेंगू कहर बरपा रहा है। शुरुआती दिनों में प्राइवेट पैथालॉजी की जांच में डेंगू के आसार पाए जाने पर जिला अस्पताल के डाक्टरों ने इसके मरीजों को रेफर करना शुरू कर दिया। शासन और स्थानीय प्रशासन के दबाव पर डेंगू के लिए दो वार्ड आरक्षित कर दिए गए। दोनों में आठ-आठ बेड डाले गए हैं, लेकिन ये सूने पड़े हैं। इनमें डेंगू का कोई मरीज भर्ती नहीं हुआ। डेंगू की तनिक भी आशंका होती है तो मरीज को जिले से बाहर रेफर कर दिया जाता है।
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यह हालत तब है जबकि जिला अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित सेपरेशन यूनिट चालू हो गई है। इसमें ब्लड की तमाम जांच और प्लेट्लेटस की भी व्यवस्था है। कई लोगों की मौतें और दर्जनों डेंगू मरीज सामने आने के बाद भी जिला अस्पताल में किसी का भी इलाज नहीं किया गया। सबको रेफर कर दिया गया। डेंगू के इलाज में मरीज को तत्काल प्लेट्लेटस की जरूरत होती है।

जिला अस्पताल के सेपरेशन यूनिट में इसकी व्यवस्था है। लेकिन हैरत की बात यह है कि आज तक एक भी मरीज के लिए अस्पताल के डाक्टरों ने ब्लड बैंक में लगी सेपरेशन यूनिट से प्लेट्लेटस नहीं मांगी। ब्लड बैंक में कार्यरत आरके द्विवेदी ने बताया कि यहां ब्लड बैंक में प्लेट्लेटस की व्यवस्था है, लेकिन अब तक डिमांड नहीं आई। उन्होंने बताया कि प्लेट्लेटस ढाई दिन खराब नहीं होती। डिमांड आने पर इसकी आपूर्ति की जाती है।

उधर, इस बारे में जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. किशोरी लाल ने बताया कि डेंगू के इलाज की अस्पताल में विशेष व्यवस्था की गई है। अलग वार्ड आरक्षित किए गए हैं। तीन-तीन नर्स की ड्यूटी लगाई गई है। इसकी मुख्य दवा पैरासीटामाल भी पर्याप्त मात्रा में हैं। जरूरत पड़ने पर ब्लड बैंक से प्लेट्लेटस मंगाई जाएगी।

पूर्व उप निदेशक के पुत्र को डेंगू
बांदा। जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों को रोजाना रेफर किए जाने की श्रृंखला में गुरुवार को भी चार मरीजों को डेंगू की आशंका पाए जाने पर रेफर कर दिया गया। सूचना विभाग के सेवानिवृत्त उप निदेशक रामखिलावन के 27 वर्षीय पुत्र रजनीश को तीन दिन से बुखार था। उसे बुधवार को जिला अस्पताल लाया गया।

डाक्टरों ने दो इंजेक्शन और ओआरएस पिलाकर डिस्चार्ज कर दिया। गुरुवार को निजी पैथालाजी में ब्लड चेकअप कराकर जांच रिपोर्ट जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में ड्यूटी कर रहे डाक्टर को दिखाई गई तो उन्होंने डेंगू की संभावना जताकर रेफर कर दिया। परिजन उसे कानपुर ले गए हैं। उधर, रवि (12) पुत्र श्यामलाल (जरैली कोठी) और सरवन (45) पुत्र होरीलाल (हमीरपुर) और सुशील (24) पुत्र गजराज (महुआ) को भर्ती किया गया है। इनकी जांच चल रही है।
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