बांदा। आपस में दूरियां बढ़ाना भी कोरोना से बचाव है। न हाथ मिलाएं, न गले लगाएं। दफ्तरों में कर्मचारी अपनी मेजों में एक मीटर की दूरी बनाएं। बाजार में ग्राहकों से और सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों में आपस में भी इस दूरी का पैमाना अपनाएं। इन सबके बाद भी अगर किसी को कोरोना वायरस होता है तो सरकार उसका इलाज अपने खर्च पर कराएगी।
प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने यही शासनादेश मंगलवार (17 मार्च) को जारी किया है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों के नाम जारी पत्र में सरकार के निर्णय का हवाला देकर कहा है कि रेस्टोरेंट आदि में मेजों के बीच एक मीटर की दूरी हो। संभव हो तो बैठने की व्यवस्था खुले में की जाए।
हाथ मिलाना या गले लगाना जैसे अभिवादन से बचें। कहीं कार्यक्रमों में हों तो लोगों के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी रहे। आयोजनों में हाथ धोने के लिए साबुन, पानी, हैंड सैनिटाइजर की व्यवस्था हो। बाजारों में ग्राहकों से एक मीटर की दूरी बनाएं।
जिन कार्यालयों/संस्थानों में कर्मचारियों की उपस्थिति बायोमीट्रिक मशीनों से होती हैं वहां 2 अप्रैल तक इस व्यवस्था को भी रोका जाए। रजिस्टर में हाजिरी हो। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि धर्मगुरुओं से बात कर अपील करें कि कम से कम लोग आएं। भीड़ न इकट्ठा करें।
मॉस्क और हैंड सैनिटाइजर आवश्यक वस्तु घोषित
बांदा। कोरोना वायरस से बचाव के लिए बड़ी संख्या में बिक रहे मॉस्क और हैंड सैनिटाइजर की कालाबाजारी और कृत्रिम किल्लत के मद्देनजर केंद्र सरकार ने इन दोनों वस्तुओं को तत्काल प्रभाव से आवश्यक वस्तु घोषित कर दिया है। अब यह आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत शामिल कर इसकी अधिसूचना जारी की गई है।
डीएम अमित सिंह बंसल ने बुधवार को जारी आदेश में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, नई दिल्ली सचिव के आदेश का हवाला देकर कहा है कि दो प्लाई एवं तीन प्लाई के सर्जिकल मॉस्क और एन-95 मॉस्क तथा हैंड सैनिटाइजर आवश्यक वस्तु घोषित कर दिए गए हैं।
यह अधिसूचना 30 जून 2020 तक लागू रहेगी। डीएम ने कहा है कि अब इन दोनों वस्तुओं की कालाबाजारी या अधिक मूल्य पर बिक्री करते पाए जाने पर व्यवसायी के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जजी परिसर में 21 तक वादकारी नहीं होंगे दाखिल
बांदा। बुधवार को यहां जजी परिसर में जबरदस्त पुलिस पहरा लग गया। मुख्य गेट पर तैनात पुलिस कर्मियों ने छानबीन और जांच-पड़ताल के बाद ही न्यायालय कर्मियों और अधिवक्ताओं को बमुश्किल प्रवेश दिया।
उधर, जिला जजी के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ओमेश्वर निगम द्वारा जारी सूचना में कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों पर जनपद न्यायाधीश ने वादकारियों का न्यायालय परिसर में 21 मार्च तक प्रवेश प्रतिबंधित किया है।
इस दौरान सिविल, क्रिमिनल सहित सभी मुकदमों में श्रेणीवार सामान्य तिथि निर्धारित की जाएगी। जनपद न्यायाधीश और अन्य नामित न्यायाधीश सिर्फ आवश्यक मामलों की सुनवाई करेंगे। किसी भी वादकारी, अभियुक्त/अधिवक्ता की अनुपस्थिति में कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जाएगा।