बांदा। जिला पंचायत ने अक्तूबर में ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए लाखों रुपये के टेंडर नियम विरुद्ध करा दिए।
सदस्यों की शिकायत पर मंडलायुक्त ने दो सदस्यीय जांच टीम गठित की। आख्या मिलने के बाद उन्होंने तीन टेंडर निरस्त कर दिए। साथ ही जल्द बोर्ड बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं।
भाजपा की जिला पंचायत सदस्य सुजाता देवी, अरुण सिंह पटेल, मीरा देवी, सदाशिव अनुरागी, रामकेश राजपूत व संगीता देवी ने 30 अक्तूबर को मंडलायुक्त व डीएम से शिकायत की। आरोप है कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए करीब एक करोड़ रुपये के टेंडर किए गए हैं। यह नियम विरुद्ध हैं।
जांच करते हुए इन्हें निरस्त कराया जाए। साथ ही 17 सितंबर के बाद से आज तक बोर्ड बैठक न बुलाने का भी आरोप लगाया था। मंडलायुक्त आरपी सिंह ने मामले का संज्ञान लेते हुए 30 अक्तूबर को अपर आयुक्त प्रशासन और सीडीओ वेद प्रकाश मौर्य की दो सदस्यीय जांच टीम गठित की।
टीम ने मामले की जांच करते हुए चार नवंबर को उन्हें जांच आख्या सौंपी। बताया गया कि करीब 50 कार्यों के लिए जिला पंचायत ने निविदा आमंत्रित की थीं। इनमें से तीन ऐसे कार्यों के 50 लाख के टेंडर नियम विरुद्ध हैं।
शासनादेश के मुताबिक जिला पंचायत को ग्राम पंचायतों के अंदर कार्य करने का अधिकार नहीं है, जबकि यह निविदाएं ग्राम पंचायत के अंदर कार्यों के लिए की गई हैं।
उन्होंने निविदाएं निरस्त कर दी हैं। साथ ही एक माह के अंदर बोर्ड बैठक बुलाने के निर्देश अपर मुख्य अधिकारी धर्मेंद्र कुमार को दिए हैं।