बांदा। जिला अस्पताल के ट्रांसफार्मर की सीटी फुंकने से बिजली गुल हो गई। इससे सीटी स्कैन, मंडलीय चिकित्सालय में संचालित दंत विभाग के उपकरण, सुनने की मशीन, फिजियोथेरेपी मशीनें ठप हो गईं। डॉक्टरों ने सिर्फ ओपीडी की। मरीजों को दवा लिखकर भेज दिया गया। इलाज के लिए करीब 200 मरीज भटकते नजर आए।
रविवार को सुबह छह बजे जिला अस्पताल के लिए आई 33 केवी मेन लाइन के बस्ट होने से सोमवार, मंगलवार व बुधवार को 11 केवी बिजली लाइन जोड़कर काम चलाया जा रहा था। बुधवार को बिजली विभाग के कर्मियों ने 33 केवी मेन लाइन को बदला तो ट्रांसफार्मर में लगी सीटी फुंक गई। इससे हालात फिर जस के तस हो गए।
जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न होने पाएं, इसके लिए जेनरेटर से बिजली सप्लाई दी गई। इस व्यवस्था में जिला अस्पताल परिसर में लगी सीटी स्कैन, मंडलीय चिकित्सालय में दंत विभाग, फिजियोथेरेपी, नाक, कान गला रोग विभाग के उपकरण नहीं चल सके।
मंडलीय चिकित्सालय में अंधेरा होने से डॉक्टर अपना कक्ष छोड़कर बरामदे में मरीजों की ओपीडी की। डॉक्टरों ने सिर्फ दवा लिखकर मरीजों को देखा। उधर, ओटी में जनरेटर की सुविधा होने की वजह से ऑपरेशन प्रभावित नहीं हुए। जिला अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन ने बताया कि रविवार से अब तक 150 लीटर डीजल लग चुका है।
नहीं हो पाया सीटी स्कैन
सिटी स्कैन कराने आए गिरवां के रामदयाल ने बताया कि उसके भाई महेश के सिर में दर्द होने की वजह से डाक्टरों ने सीटी स्कैन कराने को लिखा था, यहां आए तो पता चला कि सीटी स्कैन की मशीन बंद है। अब इन्हें लौटना पड़ रहा है।
दांत का इलाज नहीं हो पाया
शहर के क्योटरा मोहल्ला निवासी रफीक खां ने बताया कि वह दांत में दर्द होने पर मंडलीय चिकित्सालय पहुंचे। यहां बिजली न होने से इलाज नहीं हो सका है।
वर्जन
मुख्य लाइन बस्ट होने और सीटी फुंकने से यह समस्या आई है। सीटी स्कैन मशीन, मंडलीय चिकित्सालय के उपकरण आदि नहीं चल सके हैं। शेष कार्य जनरेटर से सप्लाई देकर कराया गया है। डॉ. के. कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल बांदा।