बबेरू। मुंशी प्रेमचंद्र की जयंती पर भूमि विकास बैंक में गोष्ठी हुई। डा. रामचंद्र सरस ने गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। कहा कि मुंशी प्रेमचंद कहानियां जैसे ईदगाह पंच परमेश्वर, पूस की रात, ठाकुर का कुआं आज प्रासंगिक है। जिन्हें पढ़कर प्रगतिशील धारा की ओर अग्रसर हुआ।
शिशुपाल ने कहानी जलाशयों के पुनर्निर्माण की कहानी सुनाकर स्पष्ट किया कि सरकारी धन का पूरी तरह से दुरुपयोग हो रहा है। तालाब मर चुके है बच्चे गुल्ली-डंडा खेल रहे है। पुराने पेड़ नष्ट हो गए हैं। रामकरण साहू ने तीन गजलें सुनाई। प्रमोद आजाद, अमित कुमार, रमेश चंद्र, संत कुमार, राज कुमार ने अपने विचार व्यक्त किए।
कहा कि मुंशी के जमाने की स्थिति से आज भी किसान उबर नहीं सका। किसान की स्थिति जस की तस है। आज न पेड़ बच रहे न नदी बच रही। इसे बचाना मुंशी प्रेमचद को याद करना होगा।