बांदा व महोबा में डायरिया से पीआरडी जवान समेत दो लोगों की मौत हो गई। बरसात में फैले डायरिया से हो रही मौतों में सोमवार को जिला अस्पताल में पीआरडी जवान की भी मौत हो गई। डेढ़ दर्जन से ज्यादा मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बता दें कि शनिवार व रविवार को भी बांदा, महोबा व चित्रकूट में सात लोग डायरिया व बुखार से दम तोड़ चुके हैं।
बांदा के देहात कोतवाली क्षेत्र के गुरेह गांव का नत्थू तिवारी (50) पुत्र बाबूलाल प्रांतीय रक्षा दल (पीआरडी) में था। उसकी ड्यूटी इन दिनों एक प्राईवेट बैंक में थी। रविवार की रात उसे उल्टी-दस्त शुरू हो गए। सुबह परिजन उसे जिला अस्पताल लाए।
यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उधर, डायरिया ग्रस्त नथुनिया (38) निवासी शेखनपुर, सुधा देवी (24) निवासी गिरवां, नीलम (25) निवासी बिजली खेड़ा, मेड़िया (40) निवासी महोखर, रमा देवी (20) निवासी सैमरी, शिव प्रसाद (80) निवासी मुरवल, जितेंद्र (16) निवासी घंडुवा, भैरमदीन (70) निवासी बिसंडा, यासमीन (19) निवासी मर्दन नाका, जितेंद्र सिंह (28) निवासी पिपरहरी, शांती (50) निवासी खाईंपार, बतूलन (60) निवासी निम्नीपार, किरन (26) निवासी क्योटरा व पूजा (3) निवासी गुरेह को सोमवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
103 बेड वाले अस्पताल में पिछले तीन दिनों से भर्ती मरीजों में लगभग 40 फीसदी डायरिया के मरीज हैं। बुखार व डायरिया के बढ़ते मरीजों के चलते पुराने इमर्जेंसी कक्ष में 10 बेंच लगाकर मरीजों को लिटाया गया है। नेत्र वार्ड भी बुखार व डायरिया के मरीजों से भरा है।
उधर, महोबा में डायरिया प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इसकी चपेट में आकर एक ग्रामीण की मौत हो गई। जबकि आधा दर्जन से ज्यादा डायरिया से पीड़ित मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राइवेट अस्पतालों में भी डायरिया से पीड़ित मरीजों की भीड़ बढ़ रही है।
कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बीजानगर निवासी पूरन (80) जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, भटीपुरा निवासी मयंक, दोहरे रैकवार निवासी राशिद, शेखूनगर निवासी क्रांति, पठा निवासी गोमती रैकवार व अर्जुन को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर उपचार के बाद हालत में सुधार बताया जा रहा है।
इसी तरह प्राइवेट अस्पतालों में भी डायरिया से पीड़ित मरीजों की भरमार है। बुखार और डायरियों के मरीजों की भारी भीड़ जुटने से प्राइवेट डाक्टर चांदी काट रहे है। सुबह से शाम तक अस्पतालों में मरीजों की भीड़ रहती है।